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Indramani Badoni: सीएम धामी ने ‘उत्तराखंड के गांधी’ इंद्रमणि बडोनी को दी श्रद्धांजलि, जयंती पर याद किया योगदान

उत्तराखंड के राज्य आंदोलन के नायक Indramani Badoni की 100वीं जयंती पर सीएम पुष्कर सिंह धामी ने उन्हें पुष्पांजलि अर्पित की। बडोनी का जीवन त्याग, संघर्ष और जनसेवा का प्रेरणास्रोत रहा।
Indramani Badoni

Indramani Badoni: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को मुख्यमंत्री आवास में राज्य आंदोलन के महान नायक और ‘उत्तराखंड के गांधी’ के नाम से प्रसिद्ध इंद्रमणि बडोनी की 100वीं जयंती पर उनको पुष्पांजलि अर्पित की।

सीएम धामी ने उनकी सेवा और त्याग को सराहा

इस अवसर पर सीएम धामी ने बडोनी के जीवन और संघर्ष को याद करते हुए कहा कि उनका पूरा जीवन त्याग, संघर्ष, अहिंसा और जनसेवा को समर्पित रहा। उन्होंने उत्तराखंड राज्य आंदोलन को दिशा दी, जनशक्ति जुटाई और पहाड़ी क्षेत्रों के विकास के लिए दूरदर्शी सोच रखी। मुख्यमंत्री ने कहा कि बडोनी के विचार, संकल्प और निस्वार्थ सेवा भाव आज भी युवाओं और नेताओं के लिए प्रेरणास्रोत हैं। राज्य सरकार उनके आदर्शों पर चलते हुए उत्तराखंड को देश का सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है।

Indramani Badoni का राज्य आंदोलन में योगदान

सीएम धामी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए लिखा, “शासकीय आवास पर उत्कृष्ट समाजसेवी एवं उत्तराखंड राज्य आंदोलन के अग्रणी नेता श्रद्धेय इंद्रमणि बडोनी की जयंती पर पुष्प अर्पित कर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि दी। उत्तराखंड राज्य निर्माण के लिए उनका त्याग, संघर्ष और दूरदर्शी नेतृत्व सदैव स्मरणीय रहेगा। प्रदेश की अस्मिता, अधिकारों और जनसेवा को समर्पित उनका जीवन हम सभी के लिए प्रेरणास्रोत है।”

Indramani Badoni इंद्रमणि बडोनी
इंद्रमणि बडोनी

उत्तराखंड निर्माण में उनका अनसंग योगदान

इंद्रमणि बडोनी का जन्म 24 दिसंबर 1925 को टिहरी गढ़वाल के अखोड़ी गांव में हुआ था। उन्होंने अहिंसक आंदोलन के माध्यम से उत्तराखंड राज्य की मांग को मजबूती दी। 1988 में उन्होंने 105 दिनों की पैदल यात्रा की, जिसमें पिथौरागढ़ से देहरादून तक गांव-गांव जाकर लोगों को जागरूक किया। 1994 में पौड़ी में आमरण अनशन किया, जिसके बाद उन्हें जेल भेजा गया, लेकिन इससे आंदोलन और तेज हुआ।

उनकी अहिंसा और सादगी के कारण वाशिंगटन पोस्ट ने उन्हें ‘माउंटेन गांधी’ कहा। 18 अगस्त 1999 को ऋषिकेश में उनका निधन हो गया, लेकिन उनकी मौत के एक साल बाद 9 नवंबर 2000 को उत्तराखंड राज्य का निर्माण हुआ। उन्हें राज्य आंदोलन का अनसंग हीरो माना जाता है

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