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Bihar Politics: बिहार चुनाव की गर्मी में AMU बना सियासी अखाड़ा, विपक्ष ने BJP पर साधा निशाना

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Bihar Politics: बिहार में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीति के चर्चा का बाजार गर्म है। जहां एक तरफ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जनता को लुभाने के लिए आए दिन नई-नई योजनाओं का ऐलान कर रहे है वहीं दूसरी तरफ विपक्षी पार्टियां नीतीश कुमार के चुनावी रथ को रोकने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगाते नजर आ रहे है। जिले भर में चर्चा है कि आने वाले कुछ दी दिनों में चुनाव की तारीखों का ऐलान हो सकता है।

चुनाव से पहले फिर सुर्खियों में आया एएमयू

Bihar Politics: आपको बता दें कि साल 2013 में किशनगंज में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) का केंद्र कांग्रेस शासनकाल में खोला गया। जिसके पीछे का मकसद मुस्लिम वोटरों को खुश करना था। जिसके चलते अब यह केंद्र हर चुनाव में राजनीति मुद्दा बन जाता है। इस बार भी ठीक विधानसभा चुनाव से पहले एएमयू सुर्खियों में आ गया है। दरअसल, राजद, कांग्रेस, जन सुराज और एआईएमआईएम सहित तमाम विपक्षी पार्टियां इस मुद्दे को भुनाने में जुट गई है। जहां एक तरफ विपक्षी पार्टियां एनडीए को इसके लिए जिम्मेवार ठहरा रही है तो वहीं दूसरी तरफ भाजपा एनजीटी की वजह से विकसित नहीं होने का ढिंढोरा पीट रही है। गौरतलब है कि कुछ  दिनों पहले जनसुराज पार्टी के मुखिया प्रशांत किशोर एक कार्यक्रम में किशनगंज पहुंचे जहां उन्होंने इस मुद्दे को उठाने के साथ ही एएमयू परिसर का भी निरीक्षण किया था। इस दौरान उन्होंने एएमयू शाखा के विकास नहीं होने के लिए सरकार को कठघरे में खड़ा करते हुए कई सवाल खड़े किए थे। जिसके बाद अपने चार दिवसीय दौरे पर सीमांचल पहुंचे AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी हर सभा में इस मुद्दे को उठाते रहे।

भाजपा बोली- एनजीटी ने निर्माण कार्य रोका

Bihar Politics: इस मामले में भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष सह 20 सूत्री के उपाध्यक्ष सुशांत गोप कहते हैं कि सरकार द्वारा 136 करोड़ से अधिक की स्वीकृति वर्षों पहले दी जा चुकी है। लेकिन महानंदा नदी के किनारे जमीन रहने की वजह से एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) ने निर्माण पर रोक लगा दी थी। जबतक वहां से हरी झंडी नहीं मिल जाती है तबतक भवन का निर्माण कैसे होगा। वहीं दूसरी तरफ मामले में सांसद डॉ. मु. जावेद आजाद का कहना है कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री को पत्र लिखकर कहा गया था कि 2013 में स्थापित एएमयू किशनगंज केंद्र आज भी स्थायी परिसर के बिना अस्थायी भवन से संचालित हो रहा है। जहां केवल एमबीए पाठ्यक्रम ही चल रहा है। कर्मी व प्राध्यापक की कमी है। मंत्रालय ने 2014 में आवंटित 136.82 करोड़ में से अब तक केवल 10 करोड़ जारी किया गया। यूजीसी द्वारा स्वीकृत शिक्षण व गैर-शिक्षण स्टाफ की नियुक्ति नहीं हुई है।

सवाल अभी तक क्यों नहीं बना भवन ?

Bihar Politics: मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, एएमयू शाखा किशनगंज के लिए 136.82 करोड़ रुपये का फंड निर्गत करने की स्वीकृति दी गई थी। एएमयू की शाखा किशनगंज में तो खुल गई। लेकिन उचित राशि नहीं मिलने के कारण यह शाखा अब तक किराए के मकान में चल रही है। यहीं कारण है कि अभी तक शाखा में नए कोर्स की पढ़ाई शुरु नहीं हो पाई है। नदी किनारे जमीन होने और एनजीटी का भवन निर्माण संबंधित हवाला देकर राशि नहीं दी। किशनगंज में एएमयू की शाखा खुलने के बाद यहां बीएड और एमबीए कोर्स की पढ़ाई शुरू हुई थी। तकनीकी कारणों से बीएड कोर्स की पढ़ाई बंद हो गए। वर्तमान में केवल 60 सीट के लिए एमबीए कोर्स की पढ़ाई जारी है।

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