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women crime: भारत में महिलाओं पर बढ़ते अपराध: क्या आंकड़े बता रहे हैं सच्चाई?

women crime से जुड़े बढ़ते अपराधों के आंकड़े दर्शाती रिपोर्ट

women crime: हर साल देश में महिलाओं पर हो रहे अपराधों के संख्या बढ़ती जा रही हैं। जहां एक ओर महिलाओं को समान अधिकार देने की बात कही जाती है, वहीं दूसरी तरफ कुछ महिलाएं अपने घर में तक सुरक्षित नहीं रह पाती है।रिपोर्ट्स की माने तो महिलाओं पर लगभग 13,21,745 अपराध साल 2021 से 2023 के बीच में दर्ज हुए है। इसका साफ मतलब है कि हर तीन मिनट में कोई एक महिला अपराध का शिकार होती है। इन आंकड़ों को देख कर अब महिलाओं की सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

women crime से जुड़े बढ़ते अपराधों के आंकड़े दर्शाती रिपोर्ट
बढ़ते अपराधों के आंकड़े दर्शाती रिपोर्ट

women crime: किन राज्यों में मामले सबसे ज्यादा?

women crime: गृह राज्य मंत्री बंदी संजय कुमार ने राज्यसभा में महिलाओं पर हो रहे अपराधों को लेकर कुछ आंकड़े पेश किए। इन आंकड़ों को देख कर हर कोई हैरान रह गया बता दें, सिर्फ उत्तर प्रदेश में ही साल 2021, 2022 और 2023 में 1,88,207 मामले महिलाओं पर हो रहे जुर्म पर के खिलाफ दर्ज किए गए, इसके बाद 1,31,958 महाराष्ट्र, 1,31,246 राजस्थान, 1,05,313 बंगाल, 95,780 मध्य प्रदेश में मामले सामने आए है। यह कोई छोटे मोटे मामले नहीं है इसमें 4,09,929 मामले ससुराल वालों द्वारा किए गए क्रूरता और 2,49,284 अपरहण जैसे गंभीर अपराध है।

बढ़ते अपराधों के आंकड़े दर्शाती रिपोर्ट
बढ़ते अपराधों के आंकड़े दर्शाती रिपोर्ट

घरेलू हिंसा, अपहरण और क्रूरता में उछाल

women crime: महिलाओं के बाद मासूम बच्चों पर भी अपराधों के मामले लगातार बढ़ रहे है। इसमें अपहरण और पोक्सो अधिनियम के तहत सबसे ज्यादा केस दर्ज किए गए है। इन तीन सालों में 4,89,188 मामले बच्चों पर हो रहे अपराध पर दर्ज हुए है। जिसमें मध्य प्रदेश सबसे आगे है 61,981 मध्य प्रदेश से, 60,413 महाराष्ट्र और 54,372 उत्तर प्रदेश से सामने आए है। यही नहीं देश में बाल विवाह कानूनी जुर्म होने के बाबजूद बाल विवाह अधिनियम के तहत 2023 में 6,038 मामले दर्ज हुए, साल 2022 में 1,002 और 2021 में 1,050 मामले थे।

बच्चों पर बढ़ते अपराध

women crime: इस तरह के गंभीर अपराधों का बढ़ना सामाजिक और कानून-व्यवस्था की चुनौतियों को चुनौती देता हैं। हालात अब चिंताजनत स्थिति में पहुंच चुके है। घरेलू हिंसा, अपहरण, यौन अपराध और बाल शोषण जैसी अपराधों को रोकना और इन पर सख्त कार्यवाही करना आवश्यक है।

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