New Delhi News: दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को चार दशक पुराने एक मामले में नोटिस जारी किया है। यह विवाद 1980 की वोटर लिस्ट से जुड़ा है, जिसमें सोनिया गांधी का नाम उस समय मौजूद बताया गया है जब वे भारतीय नागरिक भी नहीं थीं। सोनिया गांधी को भारत की नागरिकता वर्ष 1983 में मिली थी, ऐसे में अदालत ने पूछा है कि तीन साल पहले उनका नाम मतदाता सूची में कैसे शामिल हुआ।
नागरिकता से पहले वोटर बनने का आरोप
यह मामला विकास त्रिपाठी नाम के व्यक्ति की याचिका से शुरू हुआ, जिसमें दावा किया गया कि सोनिया गांधी ने नागरिकता प्राप्त करने से पहले ही मतदाता सूची में नाम शामिल करा लिया था। याचिकाकर्ता का कहना है कि ऐसा करना कानून का उल्लंघन है और यदि नाम जुड़वाने के लिए किसी तरह के गलत दस्तावेज इस्तेमाल किए गए हों, तो यह अपराध की श्रेणी में आता है।
New Delhi News: पहली याचिका खारिज, फिर रिवीजन में बदला मामला
इस मामले की सुनवाई पहले एसीएमएम वैभव चौरेसिया की अदालत में हुई, जहां 11 सितंबर को याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी गई कि मतदाता सूची से जुड़े मामलों की जांच अदालत के अधिकार क्षेत्र में नहीं आती और यह चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है। अदालत ने कहा कि ऐसी जांच संविधान के अनुच्छेद 329 के खिलाफ होगी। याचिकाकर्ता ने इस आदेश को चुनौती दी जिसके बाद मामला राउज एवेन्यू कोर्ट पहुंचा और वहीं से सोनिया गांधी को नोटिस जारी किया गया।
अदालत का सवाल 1980 में नाम कैसे जुड़ा?
कोर्ट ने सोनिया गांधी और दिल्ली पुलिस दोनों से जवाब मांगा है। अदालत ने कहा कि यदि नागरिकता 1983 में मिली थी, तो 1980 की वोटर लिस्ट में नाम शामिल होने का आधार क्या था। कोर्ट ने यह भी ध्यान दिलाया कि 1982 में सोनिया गांधी का नाम मतदाता सूची से हटाया भी गया था, लेकिन यह क्यों हटाया गया, इसका साफ रिकॉर्ड सामने नहीं है।
New Delhi News: जालसाजी के आरोपों की जांच होगी
याचिका में यह भी कहा गया है कि पहली बार नाम जोड़ते समय फर्जी कागज़ों का सहारा लिया गया होगा। अदालत ने साफ किया कि इन सभी बिंदुओं की जांच जरूरी है, तभी यह तय होगा कि मामला आगे ट्रायल में जाएगा या नहीं। राजनीतिक तौर पर भी यह विवाद इसलिए गर्माया है क्योंकि वर्तमान समय में चुनाव सुधारों पर राष्ट्रीय बहस जारी है, और ऐसे में पुरानी फाइलें खुलने को लेकर कई तरह की प्रतिक्रियाएँ सामने आ रही हैं।
अगले कदम क्या होंगे
अब सोनिया गांधी को अदालत के सामने अपना पक्ष रखना होगा और दिल्ली पुलिस को रिपोर्ट दाखिल करनी होगी। इसके बाद कोर्ट तय करेगा कि यह मामला केवल दस्तावेज़ी विवाद है या फिर किसी बड़े अपराध का संकेत देता है।स्पष्ट है कि वर्षों पुराना यह विवाद एक बार फिर राजनीति और न्यायालय दोनों के केंद्र में आ गया है।
Written By: Nishi Sharma
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