Bangladesh News: बांग्लादेश से एक बार फिर ऐसी खबर सामने आई है, जिसने पूरे इलाके में डर और असमंजस का माहौल पैदा कर दिया है। राजबाड़ी जिले के पांग्शा इलाके में एक हिंदू युवक अमृत मंडल उर्फ सम्राट की भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। घटना 24 दिसंबर की बताई जा रही है और इसके बाद से इलाके में तनाव बना हुआ है। इस हत्या ने न केवल कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर भी नई बहस छेड़ दी है।
Bangladesh News: गांव का ही रहने वाला था अमृत
स्थानीय लोगों के अनुसार, अमृत मंडल उसी गांव का रहने वाला था, जहां उसकी मौत हुई। बताया जा रहा है कि वह हुसैनडांगा के पुराने बाजार इलाके में एक व्यक्ति के घर पहुंचा था। आरोप है कि उसने वहां पैसे की मांग की। जब घर के मुखिया ने पैसे देने से इनकार कर दिया, तो स्थिति तनावपूर्ण हो गई। ग्रामीणों का कहना है कि इसके बाद अमृत मंडल के साथ मौजूद लोगों ने घर के बेटे के साथ मारपीट शुरू कर दी।
Bangladesh News:‘चोर-चोर’ की आवाज और जुटती गई भीड़
जब घरवालों ने शोर मचाया और चोर-चोर की आवाजें गांव में गूंजने लगीं, तो बड़ी संख्या में लोग मौके पर जमा हो गए। गुस्से में आई भीड़ ने अमृत मंडल को पकड़ लिया और उसकी पिटाई कर दी। हालात इतने बिगड़ गए कि जब तक पुलिस पहुंची, तब तक वह गंभीर रूप से घायल हो चुका था।
अस्पताल पहुंचा, लेकिन मौत ने तोड़ दी सारी उम्मीदें
पुलिस ने अमृत मंडल को तुरंत अस्पताल पहुंचाया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इस मामले में उसके एक सहयोगी मोहम्मद सलीम को हिरासत में लिया गया है। पुलिस का दावा है कि उसके पास से एक पिस्तौल समेत हथियार बरामद किए गए हैं, जिसकी जांच की जा रही है।
Bangladesh News: पुलिस का बड़ा दावा: ‘सम्राट वाहिनी’ और जबरन वसूली का नेटवर्क
इस घटना के बाद पुलिस के बयान ने मामले को नया मोड़ दे दिया। पुलिस के अनुसार, अमृत मंडल ने ‘सम्राट वाहिनी’ नाम से एक संगठन बनाया था, जो आसपास के इलाकों में जबरन वसूली में शामिल था। पुलिस का कहना है कि उसके खिलाफ हत्या सहित दो आपराधिक मामले पहले से दर्ज थे। यह भी बताया गया कि अवामी लीग सरकार के दौरान वह भारत चला गया था और हाल ही में ही वापस बांग्लादेश लौटा था। स्थानीय लोगों ने भी पुलिस को बताया कि वह कथित तौर पर एक आपराधिक गिरोह चला रहा था।
लेकिन सवाल वही: अगर आरोपी था, तो फैसला भीड़ ने क्यों किया?
इन तमाम दावों के बावजूद सबसे बड़ा सवाल यही उठता है कि अगर अमृत मंडल अपराधों में शामिल था, तो क्या उसे सजा देने का अधिकार भीड़ को था। कानून के तहत फैसला अदालत करती है, लेकिन यहां फैसला गुस्साई भीड़ ने कर दिया।
Bangladesh News: दीपू चंद्र दास की याद फिर ताजा, पैटर्न पर उठे सवाल
यह मामला इसलिए भी ज्यादा संवेदनशील हो जाता है क्योंकि इससे पहले दीपू चंद्र दास की भी भीड़ द्वारा हत्या कर दी गई थी। उस वक्त शुरुआत में दावा किया गया था कि मामला ईशनिंदा से जुड़ा है, लेकिन बाद में पुलिस ने साफ किया कि ऐसे किसी आरोप का कोई सबूत नहीं मिला। दीपू दास की मौत के बाद भारत समेत कई देशों में बांग्लादेश सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हुए थे।
भीड़ हिंसा क्यों बनती जा रही है नया कानून?
अब अमृत मंडल की मौत ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि बांग्लादेश में भीड़ हिंसा क्यों लगातार बढ़ रही है और क्या अल्पसंख्यक समुदाय खुद को सुरक्षित महसूस कर पा रहा है। आरोप, दावे और सफाइयां अपनी जगह हैं, लेकिन सच्चाई यही है कि न्याय का रास्ता कानून से होकर जाता है, न कि भीड़ की हिंसा से।
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