Mp news: मध्य प्रदेश का स्वास्थ्य विभाग पहले ही कई गंभीर और शर्मनाक मामलों को लेकर सवालों के घेरे में रहा है। कहीं अस्पतालों में चूहों ने नवजात बच्चों की जान ले ली, कहीं मासूमों को HIV संक्रमित खून चढ़ा दिया गया, तो कहीं जहरीली दवाओं से बच्चों की मौत हो गई। अब साल 2025 के आखिरी दिनों में एक और चौंकाने वाला सच सामने आया है। इस बार मामला इलाज की सुविधा का नहीं, बल्कि डॉक्टरों की मौजूदगी का है। राजधानी भोपाल में गरीबों और जरूरतमंदों के लिए शुरू किए गए मुख्यमंत्री संजीवनी क्लीनिक अब फर्जी हाजिरी का अड्डा बनते जा रहे हैं। डॉक्टर कागजों और डिजिटल सिस्टम में तो ड्यूटी पर मौजूद दिखते हैं, लेकिन हकीकत में क्लीनिक से नदारद रहते हैं। कोई सैकड़ों किलोमीटर दूर बैठकर हाजिरी लगा रहा था, तो कोई दूसरों से अपनी अटेंडेंस लगवा रहा था।
सार्थक ऐप के जरिए अटेंडेंस में बड़ा फर्जीवाड़ा
भोपाल के मुख्यमंत्री संजीवनी क्लीनिकों में डॉक्टरों की हाजिरी दर्ज करने के लिए ‘सार्थक ऐप’ का इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन यही ऐप कुछ डॉक्टरों के लिए फर्जीवाड़े का जरिया बन गया। सीएमएचओ कार्यालय की नियमित समीक्षा के दौरान जब अटेंडेंस डेटा की जांच की गई, तो सिस्टम की गंभीर खामियां सामने आ गईं। जांच में पाया गया कि कई डॉक्टर क्लीनिक आए बिना ही डिजिटल अटेंडेंस दर्ज कर रहे थे। अब तक की जांच में 30 डॉक्टरों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है, जिन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। वहीं 13 डॉक्टरों पर कार्रवाई करते हुए 7 दिन से लेकर एक महीने तक का वेतन काटने के आदेश दिए गए हैं।
Mp news: 500 किलोमीटर दूर से लगाई जा रही थी हाजिरी
जांच के दौरान सबसे हैरान करने वाला मामला गौतम नगर स्थित मुख्यमंत्री संजीवनी क्लीनिक से सामने आया। यहां पदस्थ एक डॉक्टर की अटेंडेंस क्लीनिक से करीब 500 किलोमीटर दूर से दर्ज की गई थी। इतना ही नहीं, उनकी रोज़ की हाजिरी भी क्लीनिक से 11–12 किलोमीटर दूर की लोकेशन से लग रही थी। इसका साफ मतलब यह है कि डॉक्टर कई दिनों तक क्लीनिक पहुंचे ही नहीं, लेकिन सिस्टम में नियमित रूप से ड्यूटी पर मौजूद दिखते रहे। डॉक्टर ने खुद यह स्वीकार किया कि वह दूर रहते हुए भी अटेंडेंस लगा रहे थे।
ऐसे किया जा रहा था हाजिरी में खेल
जानकारी के मुताबिक, सार्थक ऐप के पुराने वर्जन में कई तकनीकी खामियां थीं। ओटीपी के जरिए दूर बैठकर भी अटेंडेंस लॉक की जा सकती थी। यहां तक कि मोबाइल में सेव किसी भी फोटो के जरिए फेस वेरिफिकेशन कर हाजिरी दर्ज हो जाती थी। जांच में एक ऐसा मामला भी सामने आया, जहां डॉक्टर की जगह अलग‑अलग चेहरों, यहां तक कि एक बच्चे और युवती की फोटो से भी अटेंडेंस दर्ज की गई। इससे साफ हो गया कि ऐप के नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही थीं।
Mp news: 2025 में स्वास्थ्य विभाग पर लगे बड़े आरोप
साल 2025, मध्य प्रदेश स्वास्थ्य विभाग के लिए बेहद खराब रहा है। इस साल सामने आए कुछ बड़े मामले, इंदौर में चूहों ने दो नवजात बच्चों को कुतर दिया, जिससे उनकी मौत हो गई। जबलपुर और सतना में अस्पतालों में चूहों का आतंक, सतना जिला अस्पताल में थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों को HIV संक्रमित खून चढ़ाया गया। छिंदवाड़ा और बैतूल में जहरीले कफ सिरप से 22 से ज्यादा बच्चों की मौत, अब इन सबके बीच डॉक्टरों की फर्जी हाजिरी का मामला सामने आना सिस्टम पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।
विपक्ष का सरकार पर हमला
भोपाल में सामने आए हाजिरी घोटाले को लेकर विपक्ष ने सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि सरकार गरीबों की सेहत के साथ खिलवाड़ कर रही है और इस मामले में स्वास्थ्य मंत्री से इस्तीफे की मांग की है। वहीं सरकार का कहना है कि पूरे मामले की जांच की जा रही है और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
सवाल अब भी वही है…
Mp news: जब डॉक्टर सिर्फ कागजों और ऐप में मौजूद हों और मरीज हकीकत में इलाज के लिए भटकता रहे, तो यह सिर्फ लापरवाही नहीं बल्कि इलाज के नाम पर बेहद बेरहम धोखा है। अगर इलाज की उम्मीद लेकर आया मरीज खाली हाथ लौटे, तो समझ लीजिए सिस्टम पूरी तरह फेल हो चुका है। अब देखना यह है कि क्या जांच के बाद वाकई ठोस कार्रवाई होगी, या फिर नवजात यूं ही चूहों का शिकार होते रहेंगे, मासूम जहरीली दवाएं पीते रहेंगे और मरीज डॉक्टरों का इंतजार करते‑करते थक जाएंगे।
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