Lakhimpur Kheri: लखीमपुर खीरी जनपद के मोहम्मदी वन क्षेत्र में हरियाली के संरक्षण की जिम्मेदारी संभालने वाला वन विभाग अब खुद ही सवालों के घेरे में है। स्थानीय सूत्रों और ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि मोहम्मदी के क्षेत्रीय वनाधिकारी (रेंजर) और कुख्यात लकड़ी माफिया ‘उमर ठेकेदार’ की कथित मिलीभगत के चलते जंगल का सीना बेखौफ चीरा जा रहा है। रेंजर की सरपरस्ती में ठेकेदार का आरा दिन-रात चल रहा है, जिससे करोड़ों की वन संपदा देखते ही देखते माफियाओं की जेबों में जा रही है।
रेंजर की शह पर ‘उमर ठेकेदार’ का साम्राज्य
जंगलों की सुरक्षा के लिए नियुक्त बीट कर्मचारी और जिम्मेदार अधिकारी अपनी आंखें मूंदे बैठे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि बिना रेंजर की “हरी झंडी” के जंगल से एक पत्ता भी बाहर नहीं जा सकता, लेकिन यहाँ तो उमर ठेकेदार के ट्रक रात के सन्नाटे में लकड़ी लादकर खुलेआम सड़कों पर दौड़ रहे हैं। यह महज लापरवाही नहीं, बल्कि एक सुनियोजित भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है। माफिया और रेंजर के बीच के इस “गठजोड़” ने जंगल की सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है।
Lakhimpur Kheri: शिकायतों पर विभाग को सूंघ जाता सांप
हैरत की बात यह है कि जब भी स्थानीय पर्यावरण प्रेमियों या ग्रामीणों द्वारा रेंजर कार्यालय को अवैध कटान की सूचना दी जाती है, तो या तो फोन नहीं उठाया जाता या फिर कार्रवाई के नाम पर केवल खानापूर्ति की जाती है। सूचना का लीक होना: ग्रामीणों का दावा है कि जब भी वे किसी कटान की सूचना देते हैं, तो विभाग की ओर से माफिया को पहले ही सतर्क कर दिया जाता है। तस्करी के रास्ते साफ: मुख्य रास्तों पर गश्त न होने के कारण उमर ठेकेदार के गुर्गे बेखौफ होकर जंगलों को साफ कर रहे हैं।

संकट में वन्यजीव और पर्यावरण
रेंजर और ठेकेदार की इस सांठगांठ का खामियाजा बेजुबान वन्यजीवों और प्रकृति को भुगतना पड़ रहा है। मोहम्मदी का यह वन क्षेत्र कभी घना और हरा-भरा हुआ करता था, लेकिन अब यहाँ केवल कटे हुए पेड़ों के अवशेष और ठूंठ नजर आते हैं। पेड़ों की कमी के कारण भू-जल स्तर गिर रहा है और वन्यजीवों के रिहायशी इलाकों में आने की घटनाएं बढ़ गई हैं, जिससे कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है।
Lakhimpur Kheri: कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों ने अब उत्तर प्रदेश सरकार और वन विभाग के उच्चाधिकारियों (DFO और CCF) से मांग की है कि…
* मोहम्मदी रेंजर की संपत्तियों और उनकी कार्यप्रणाली की विजिलेंस जांच कराई जाए।
* उमर ठेकेदार के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई कर उसे जेल भेजा जाए।
* विभाग के उन सभी कर्मचारियों को चिन्हित किया जाए जो माफिया के साथ ‘पैरोल’ पर काम कर रहे हैं।
अगर ‘रक्षक ही भक्षक’ बन जाए, तो फिर हरियाली को बचाना नामुमकिन है। मोहम्मदी वन क्षेत्र का यह खेल अब खुलेआम चर्चा का विषय बन चुका है। अब देखना यह है कि लखीमपुर का जिला प्रशासन और वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी अपने ही विभाग के “काले भेड़ों” पर क्या कार्रवाई करते हैं।
Report By: संजय कुमार राठौर
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