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SIR बना ‘चक्रव्यूह’: वोट कटने के डर से सरकार पर भड़के AAP नेता योगेश दहिया

SIR IN UP

SIR IN UP: मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन की तारीख को 6 जनवरी से बढ़ाकर अब 6 मार्च 2026 कर दिया गया है। इस फैसले को लेकर जहां विपक्ष लगातार सरकार पर सवाल उठा रहा है, वहीं अब आम आदमी पार्टी के संस्थापक सदस्य एवं राष्ट्रीय परिषद सदस्य योगेश दहिया ने भी SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) प्रक्रिया को लेकर सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। योगेश दहिया ने बयान देते हुए कहा कि सरकार ने आम जनता को एक ऐसे “चक्रव्यूह” में फंसा दिया है, जहां लोग विकास और अपनी मूलभूत समस्याओं से हटकर सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं। उन्होंने कहा कि राशन कार्ड जैसी सुविधाओं के अलावा अब SIR को लेकर जनता को परेशान किया जा रहा है।

योगेश दहिया ने किया बड़ा दावा

उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार चुनाव के दौरान करीब 50 लाख मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए थे, जबकि दिल्ली चुनाव में हर विधानसभा से 40–50 हजार वोट गायब हुए। योगेश दहिया ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में चल रही मौजूदा SIR प्रक्रिया में खुद सरकार ने करीब 4 करोड़ नाम बाहर होने की संभावना जताई है। योगेश दहिया ने कहा कि सबसे बड़ी समस्या यह है कि सरकार के पास न तो चुनाव आयोग के पर्याप्त स्थायी कर्मचारी हैं और न ही SIR प्रक्रिया को सुचारू रूप से चलाने के लिए प्रशिक्षित स्टाफ। इसी वजह से सरकार को SIR की समयसीमा 6 जनवरी से बढ़ाकर 6 मार्च करनी पड़ी है। उन्होंने आशंका जताई कि 6 मार्च तक भी मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन हो पाना मुश्किल है। सरकार को यह तक स्पष्ट नहीं है कि 2003 की मतदाता सूची का क्या करना है और उस पर आई आपत्तियों और दावों का निपटारा कैसे किया जाएगा। पूरी प्रक्रिया “हवा-हवाई” तरीके से चलाई जा रही है, जिसका सबसे बड़ा नुकसान लोकतंत्र को होगा। योगेश दहिया ने चेतावनी दी कि जिन विधानसभा क्षेत्रों में 2 से 5 हजार वोटों के अंतर से जीत-हार तय होती है, वहां अगर 10 हजार वोट कट गए तो चुनाव की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो जाएंगे। कई ऐसे लोग जो पहले पार्षद, सभासद या विधायक रह चुके हैं, उनके SIR फॉर्म ही नहीं पहुंचे और उनके नाम 2003 की मतदाता सूची से भी गायब हैं। उन्होंने इसे गंभीर प्रशासनिक चूक बताया।

SIR IN UP: FIR कर लोगों को जेल भेजा जा रहा

इसके अलावा उन्होंने उन मामलों पर भी सवाल उठाए, जहां बाहर काम कर रहे लोगों के फॉर्म उनके परिवार के सदस्यों द्वारा भरे गए। उन्होंने कहा कि नियमों के अनुसार परिवार का कोई भी सदस्य फॉर्म भर सकता है, लेकिन सहारनपुर, रामपुर और अन्य जगहों पर ऐसे मामलों में FIR दर्ज कर लोगों को जेल भेजा जा रहा है। उन्होंने रामपुर की नूरजहां का उदाहरण देते हुए कहा कि उनके दो बेटे कुवैत में काम करते हैं। उनकी मां ने स्वयं फॉर्म भरकर “माता” के रूप में हस्ताक्षर किए, लेकिन सरकार ने इसे फर्जी बताते हुए कार्रवाई की। योगेश दहिया ने कहा कि कुवैत ऐसा देश है जो किसी को नागरिकता नहीं देता, ऐसे में इस तरह की कार्रवाई पूरी तरह अन्यायपूर्ण है। योगेश दहिया ने सरकार से मांग की कि SIR प्रक्रिया को पारदर्शी, सरल और जनहितैषी बनाया जाए, ताकि लोकतंत्र की जड़ों को कमजोर होने से बचाया जा सके।

Report By: Deepak Tiwari

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