Saharanpur News: नए साल 2026 से जिले के वाहन मालिकों के लिए वाहन फिटनेस कराना पहले की तुलना में कहीं अधिक मुश्किल और महंगा हो जाएगा। शासन स्तर से जारी निर्देशों के अनुसार 1 जनवरी 2026 से ट्रक, बस, पिकअप सहित सभी मध्यम व भारी वाहनों की फिटनेस जांच अब जिला स्तर पर मैनुअल तरीके से नहीं होगी, बल्कि केवल ऑटोमेटिक फिटनेस टेस्टिंग सेंटर पर ही कराई जा सकेगी। चूंकि सहारनपुर जनपद में अभी तक ऑटोमेटिक फिटनेस टेस्टिंग सेंटर का निर्माण शुरू नहीं हो सका है, ऐसे में वाहन मालिकों को उत्तराखंड के रुड़की स्थित सेंटर तक जाना अनिवार्य होगा।
वाहन स्वामियों की आर्थिक मुश्किलें और बढ़ेंगी
रुड़की जाने के लिए सहारनपुर से गुजरने वाले मार्ग पर वाहन मालिकों को चमारी खेड़ा, पुहाना और मंगलौर के तीन टोल प्लाजा से होकर गुजरना पड़ेगा, जिसका पूरा खर्च उन्हें स्वयं वहन करना होगा। हल्के वाहनों से लेकर भारी वाहनों तक यह अतिरिक्त खर्च करीब एक हजार रुपये से लेकर पांच हजार रुपये तक पहुंच सकता है। इसके अलावा ईंधन, समय और वाहन संचालन से जुड़ी अन्य परेशानियां भी झेलनी पड़ेंगी, जिससे वाहन स्वामियों की आर्थिक मुश्किलें और बढ़ जाएंगी।
Saharanpur News: सीधा लाभ उत्तराखंड सरकार को मिलेगा
अब तक जिले में हर महीने करीब 1500 छोटे-बड़े वाहनों की फिटनेस जांच मैनुअल तरीके से की जाती थी, जिनमें स्कूल वाहन, बस, टैक्सी, ऑटो, मालवाहक और अन्य व्यावसायिक वाहन शामिल थे। नई व्यवस्था लागू होने के बाद जिला स्तर पर केवल ऑटो, ई-रिक्शा जैसे छोटे वाहनों की ही फिटनेस संभव हो पाएगी, जबकि बड़े वाहनों के लिए बाहर जाना मजबूरी बन जाएगा। इस बदलाव से उत्तर प्रदेश सरकार को फिटनेस से मिलने वाला राजस्व भी प्रभावित होने की संभावना है, जबकि इसका सीधा लाभ उत्तराखंड सरकार को मिलेगा।
वाहन मालिकों का कहना है कि शासन को यह फैसला लागू करने से पहले जिले में ऑटोमेटिक फिटनेस टेस्टिंग सेंटर की व्यवस्था पूरी करनी चाहिए थी। बिना वैकल्पिक इंतजाम किए लागू की गई यह व्यवस्था व्यावसायिक वाहन चालकों और मालिकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाल रही है। फिलहाल, वाहन स्वामी उम्मीद लगाए बैठे हैं कि शासन जल्द ही इस समस्या का समाधान करते हुए जिले में ऑटोमेटिक फिटनेस सेंटर की स्थापना करेगा।
Report By: Deepak Tiwari







