Chhattisgarh News: छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले से एक ऐसी विचलित कर देने वाली घटना सामने आई है, जिसने कानून-व्यवस्था और प्रदर्शनों की नैतिकता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। तमनार क्षेत्र में कोयला खदान के विरोध के दौरान प्रदर्शनकारियों की भीड़ ने ड्यूटी पर तैनात एक महिला आरक्षी (Constable) के साथ न केवल मारपीट की, बल्कि उनकी गरिमा को तार-तार करते हुए उनके कपड़े तक फाड़ दिए।
Chhattisgarh News: ‘भाई-भाई’ कहकर गिड़गिड़ाती रही महिला सिपाही
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में देखा जा सकता है कि आंदोलन की आड़ में कुछ उपद्रवी तत्वों ने महिला पुलिसकर्मी को निशाना बनाया। भीड़ ने उन्हें दौड़ाकर खेत में गिरा दिया और उनके साथ शारीरिक अभद्रता की।
पीड़ित महिला सिपाही रोते हुए हमलावरों से अपनी अस्मत बचाने की गुहार लगाती रही। वह हमलावरों को ‘भाई’ कहकर संबोधित कर रही थी और बार-बार कह रही थी “भैया छोड़ दो, मुझे यहां ड्यूटी पर भेजा गया है, मैं अब दोबारा यहां नहीं आउंगी।” एक तरफ वह खुद को ढकने की कोशिश कर रही थी, तो दूसरी तरफ हाथ जोड़कर रहम की भीख मांग रही थी, लेकिन भीड़ के रूप में मौजूद भेड़ियों का दिल नहीं पसीजा।
Chhattisgarh News: पहले महिला इंस्पेक्टर पर हुआ था हमला
यह तमनार में हिंसा का पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी एक वीडियो सामने आया था, जिसमें उग्र प्रदर्शनकारियों ने एक महिला पुलिस इंस्पेक्टर को सरेआम लात मारी थी। इन घटनाओं ने यह स्पष्ट कर दिया है कि विरोध प्रदर्शन की आड़ में उपद्रवी तत्वों ने कानून को अपने हाथ में ले लिया है।
पुलिस की कार्रवाई: दो आरोपी गिरफ्तार, अन्य की तलाश जारी
वीडियो के व्यापक रूप से वायरल होने के बाद पुलिस प्रशासन हरकत में आया है। रायगढ़ पुलिस अधीक्षक (SP) दिव्यांग पटेल ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सख्त रुख अपनाया है।
अब तक की कार्रवाई: पुलिस ने तत्काल संज्ञान लेते हुए दो मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।
सीसीटीवी और फुटेज की जांच: एसपी ने बताया कि अन्य वीडियो फुटेज का बारीकी से विश्लेषण किया जा रहा है। घटना में शामिल अन्य चेहरों की पहचान की जा रही है और जल्द ही सबकी गिरफ्तारी की जाएगी।
आखिर क्यों सुलग रहा है रायगढ़ का तमनार?
यह पूरा विवाद जेपीएल (JPL) कोयला खदान के विस्तार और संचालन के विरोध से जुड़ा है। आंदोलन की वजह: खदान से प्रभावित 14 गांवों के ग्रामीण बीते 12 दिसंबर से अपनी विभिन्न मांगों को लेकर धरने पर बैठे हैं। हिंसा का मोड़: मांगों पर सुनवाई न होने पर 27 दिसंबर की सुबह करीब 9 बजे हजारों ग्रामीण ‘लिबरा चौक’ पर जमा हो गए और चक्काजाम कर दिया। पुलिस की टीम भीड़ को समझाने पहुंची थी, लेकिन दोपहर होते-होते भीड़ अनियंत्रित हो गई और शांतिपूर्ण प्रदर्शन ने हिंसक रूप ले लिया, जिसकी शिकार वहां तैनात महिला पुलिसकर्मी हुईं।
संपादकीय टिप्पणी: लोकतांत्रिक देश में विरोध का अधिकार सबको है, लेकिन विरोध की आड़ में किसी महिला की अस्मत से खिलवाड़ करना और कानून के रक्षकों पर हमला करना अक्षम्य अपराध है। प्रशासन को ऐसे तत्वों पर कठोरतम कार्रवाई करनी चाहिए।







