mohan bhagwat news: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में आयोजित सामाजिक सद्भाव बैठक में दूसरे दिन सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि सामाजिक सद्भाव कोई नई अवधारणा नहीं, बल्कि भारतीय समाज का मूल स्वभाव है। समाज को जोड़ने और उसे दिशा देने का कार्य केवल कानून नहीं कर सकता, बल्कि आपसी संवाद, सद्भावना और सहयोग ही समाज को सशक्त बनाते हैं।
समाज का अर्थ- समान लक्ष्य की ओर अग्रसर होना
सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि ‘समाज’ शब्द का अर्थ ही है एक गंतव्य की ओर मिलकर आगे बढ़ना। भारतीय समाज की कल्पना सदैव ऐसी रही है, जिसमें जीवन भौतिक और आध्यात्मिक दोनों दृष्टियों से संतुलित और सुखी हो। हमारे ऋषि-मुनियों ने अस्तित्व की एकता को समझते हुए राष्ट्र की सांस्कृतिक और वैचारिक नींव रखी।
mohan bhagwat news: विविधता में एकता ही हिंदू समाज की पहचान
डॉ. भागवत ने कहा कि बाहरी रूप से भिन्न दिखने के बावजूद राष्ट्र, धर्म और संस्कृति के स्तर पर हम सभी एक हैं। हिंदू कोई संज्ञा नहीं, बल्कि एक स्वभाव है, जो मत, पूजा-पद्धति या जीवनशैली के आधार पर संघर्ष नहीं करता। विविधता को स्वीकार करना ही हिंदू समाज की सबसे बड़ी शक्ति है।
समाज को तोड़ने के प्रयासों से रहना होगा सतर्क
उन्होंने कहा कि इतिहास में कई बार भ्रम फैलाकर जनजातीय और अन्य वर्गों को अलग बताकर समाज को तोड़ने के प्रयास किए गए, जबकि सच्चाई यह है कि हजारों वर्षों से इस भूमि पर रहने वाले सभी लोगों का डीएनए एक है। सद्भाव केवल संकट के समय नहीं, बल्कि हर परिस्थिति में बनाए रखना आवश्यक है।

mohan bhagwat news: संघ और शिव का भाव समान : पंडित प्रदीप मिश्रा
प्रख्यात कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने कहा कि संघ और शिव के भाव में अद्भुत समानता है। जैसे भगवान शिव ने सृष्टि की रक्षा के लिए विष पिया, वैसे ही संघ प्रतिदिन आरोपों का विष पीकर भी संयम और राष्ट्रहित में निरंतर कार्य करता है। उन्होंने कहा कि जन्म किसी भी जाति में हो, पहचान अंततः हिंदू और भारतीय की ही होती है।
धर्मांतरण पर सजगता का आह्वान
पंडित मिश्रा ने धर्मांतरण को आने वाली पीढ़ियों को प्रभावित करने वाला गंभीर षड्यंत्र बताते हुए समाज को सतर्क और जागरूक रहने का आह्वान किया। उन्होंने ‘ग्रीन महाशिवरात्रि’ जैसे अभियानों को सामाजिक समरसता का प्रभावी उदाहरण बताया।
एक समाज, एक राष्ट्र के संकल्प के साथ समापन
बैठक में विभिन्न समाजों और संगठनों ने शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक उत्थान से जुड़े कार्यों का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि समाज स्वयं आगे आकर सामूहिक प्रयासों से एक मजबूत, संगठित और सद्भावपूर्ण राष्ट्र का निर्माण करेगा।
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