ULC Scam: महाराष्ट्र की राजनीति और पुलिस प्रशासन में हलचल मचाने वाला बड़ा खुलासा सामने आया है। राज्य की पूर्व पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) रश्मि शुक्ला द्वारा तैयार की गई एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि वर्ष 2021 में तत्कालीन पुलिस महानिदेशक संजय पांडे ने वर्तमान मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को अर्बन लैंड सीलिंग (यूएलसी) घोटाले में झूठे आरोपों में फंसाने की कोशिश की थी।
गृह विभाग को सौंपी गई रिपोर्ट
यह रिपोर्ट महाराष्ट्र सरकार के गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को सौंपी गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, संजय पांडे ने ठाणे के तत्कालीन डीसीपी लक्ष्मीकांत पाटिल और एसीपी सरदार पाटिल को निर्देश दिए थे कि वे 2016 से जुड़े यूएलसी मामले में फडणवीस और शिंदे को आरोपी के रूप में दर्शाएं।
ULC Scam: गिरफ्तारी का दबाव बनाने का आरोप
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि एसीपी सरदार पाटिल पर दोनों नेताओं को गिरफ्तार करने का दबाव बनाया गया था। जांच के दौरान गिरफ्तार आरोपी संजय पुनामिया ने एक ऑडियो क्लिप जांच एजेंसियों को सौंपी है, जिसमें कथित तौर पर संजय पांडे, लक्ष्मीकांत पाटिल और सरदार पाटिल के बीच फडणवीस को फंसाने को लेकर बातचीत सुनी जा सकती है।
क्या है यूएलसी (Urban Land Ceiling) घोटाला
यूएलसी घोटाला वर्ष 1976 के अर्बन लैंड सीलिंग एक्ट से जुड़ा है। इस कानून के तहत शहरी क्षेत्रों में 500 वर्ग मीटर से अधिक जमीन सरकार के अधीन आ जाती थी, ताकि जनहित में उसका उपयोग किया जा सके। हालांकि, जांच में सामने आया कि कुछ जमीन मालिकों और अधिकारियों की मिलीभगत से फर्जी दस्तावेजों के जरिए यूएलसी से जुड़े प्रमाणपत्र हासिल किए गए, जिससे सरकारी अधिग्रहण से जमीन बचा ली गई। इससे राज्य सरकार को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ।
ULC Scam: बॉम्बे हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी
बॉम्बे हाईकोर्ट पहले ही इस मामले को महाराष्ट्र के सबसे बड़े जमीन घोटालों में से एक करार दे चुका है। मामले में अब तक कई गिरफ्तारियां हो चुकी हैं और जांच प्रक्रिया अभी जारी है।
राजनीतिक हलकों में बढ़ी हलचल
पूर्व डीजीपी की रिपोर्ट सामने आने के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। विपक्ष जहां इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है, वहीं सत्तारूढ़ पक्ष इसे राजनीतिक साजिश बताते हुए दोषियों पर सख्त कार्रवाई की बात कर रहा है।
आगे क्या?
सूत्रों के अनुसार, गृह विभाग इस रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई पर विचार कर रहा है। माना जा रहा है कि यदि आरोपों की पुष्टि होती है, तो संबंधित अधिकारियों पर अनुशासनात्मक और कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
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