Drug Free India: दिल्ली विश्वविद्यालय में नशा मुक्त भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए मंगलवार को ‘ड्रग फ्री कैंपस अभियान’ की शुरुआत की गई। इस अवसर पर देश के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान नशे के खिलाफ जागरूकता बढ़ाने के लिए एक समर्पित ई-प्रतिज्ञा मंच और मोबाइल एप्लिकेशन का भी शुभारंभ किया गया।
विश्वविद्यालय केवल शिक्षा नहीं, मूल्य निर्माण के केंद्र
उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा कि सशक्त राष्ट्र के निर्माण के लिए सशक्त नेतृत्व जरूरी है और विश्वविद्यालय केवल शैक्षणिक ज्ञान के केंद्र नहीं, बल्कि ऐसे संस्थान हैं जहां मूल्य गढ़े जाते हैं और भविष्य का नेतृत्व तैयार होता है। उन्होंने कहा कि जब दिल्ली विश्वविद्यालय जैसा प्रतिष्ठित संस्थान नशे के विरुद्ध सख्त रुख अपनाता है, तो यह पूरे समाज को एक मजबूत संदेश देता है।
Drug Free India: नशा एक सामाजिक और राष्ट्रीय चुनौती
उपराष्ट्रपति ने कहा कि नशा केवल व्यक्तिगत समस्या नहीं, बल्कि एक गंभीर सामाजिक और राष्ट्रीय चुनौती है। भारत एक युवा राष्ट्र है और ऐसे में मादक पदार्थों का दुरुपयोग देश के जनसांख्यिकीय लाभांश के लिए खतरा बन सकता है। उन्होंने चेतावनी दी कि नशा शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य, शैक्षणिक प्रदर्शन, पारिवारिक सौहार्द, उत्पादकता और यहां तक कि राष्ट्रीय सुरक्षा को भी प्रभावित करता है, विशेष रूप से नार्को-आतंकवाद से इसके संबंधों के कारण।
ड्रग फ्री कैंपस को जन-आंदोलन बनाने की अपील
उपराष्ट्रपति ने देशभर के विश्वविद्यालयों और छात्रों से अपील की कि वे ई-प्रतिज्ञा मंच के माध्यम से नशा मुक्त परिसर की शपथ लें और इस अभियान को जन-आंदोलन का रूप दें। उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री से आग्रह किया कि ड्रग फ्री कैंपस अभियान को सभी केंद्रीय उच्च शिक्षण संस्थानों का अभिन्न हिस्सा बनाया जाए।
Drug Free India: राष्ट्रीय शिक्षा नीति से जुड़ा अभियान
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 मानसिक स्वास्थ्य, जीवन कौशल और छात्र कल्याण पर विशेष जोर देती है और ड्रग फ्री कैंपस अभियान इसी समग्र दृष्टिकोण को साकार करता है। उपराष्ट्रपति ने छात्रों से सतर्क रहने और नशे की गिरफ्त में आए साथियों की मदद करने का आह्वान किया।
डीयू को बताया आदर्श मॉडल
दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रयासों की सराहना करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि जागरूकता, परामर्श और छात्र-नेतृत्व वाली पहलें समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकती हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि दिल्ली विश्वविद्यालय एक आदर्श नशा मुक्त परिसर के रूप में उभरेगा और नशा मुक्त भारत के लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
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