Lakhimpur Kheri: लखीमपुर खीरी जनपद की पलिया तहसील में इन दिनों ‘कंबल’ की गर्माहट अब सियासी और प्रशासनिक गलियारों में आग उगल रही है। कंबल वितरण में कथित धांधली और चोरी के आरोपों को लेकर शुरू हुआ विवाद अब थमने का नाम नहीं ले रहा है। आज पलिया तहसील के सैकड़ों अधिवक्ता सड़क पर उतर आए और एसडीएम पलिया के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए पैदल मार्च निकाला। अधिवक्ताओं का आक्रोश इतना था कि उन्होंने तहसील से लेकर सीओ ऑफिस तक विरोध प्रदर्शन किया और एसडीएम के खिलाफ तहरीर देकर कड़ी कार्रवाई की मांग की।
“कंबल चोरों पलिया छोड़ो” के नारों से दहला इलाका
सोमवार को तहसील परिसर से शुरू हुआ यह प्रदर्शन पलिया की मुख्य सड़कों से होता हुआ क्षेत्राधिकारी (सीओ) कार्यालय तक पहुँचा। प्रदर्शनकारी अधिवक्ताओं के हाथों में विरोध की तख्तियां थीं और जुबान पर तीखे नारे। अधिवक्ताओं ने “एसडीएम पलिया होश में आओ”, “कंबल चोरों पलिया छोड़ो” और “रिश्वतखोर तेरे बच्चे बनेंगे चोर” जैसे बेहद तल्ख और अपमानजनक नारों के साथ अपना विरोध दर्ज कराया। वकीलों के इस उग्र रूप को देखकर प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए।
Lakhimpur Kheri: क्या है पूरा विवाद?
दरअसल, यह पूरा मामला गरीबों को बांटे जाने वाले कंबलों की कथित चोरी और वितरण में अनियमितता से जुड़ा बताया जा रहा है। अधिवक्ताओं का आरोप है कि एसडीएम पलिया के संरक्षण में कंबलों का बंदरबांट किया गया और पात्रों की जगह अपात्रों या निजी लाभ के लिए इसका इस्तेमाल हुआ। वकीलों का कहना है कि जब इस भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाई गई, तो प्रशासन ने संतोषजनक जवाब देने के बजाय टालमटोल की, जिससे अधिवक्ताओं का गुस्सा फूट पड़ा।
सीओ ऑफिस में दी तहरीर, कार्रवाई की मांग
तहसील से पैदल मार्च करते हुए वकीलों का जत्था सीधे सीओ कार्यालय पहुँचा। यहाँ अधिवक्ताओं ने पुलिस क्षेत्राधिकारी को एक लिखित तहरीर सौंपी, जिसमें एसडीएम पलिया और संबंधित कर्मचारियों पर भ्रष्टाचार और कंबल चोरी के गंभीर आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज करने की मांग की गई है। अधिवक्ताओं ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि जब तक आरोपी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई नहीं होती और उन्हें पद से नहीं हटाया जाता, तब तक उनका यह आंदोलन और भी उग्र रूप धारण करेगा।
Lakhimpur Kheri: प्रशासनिक कामकाज ठप
अधिवक्ताओं के इस प्रदर्शन और हड़ताल के चलते तहसील में न्यायिक और प्रशासनिक कामकाज पूरी तरह ठप रहा। दूर-दराज से आए फरियादियों को बिना काम कराए ही वापस लौटना पड़ा। वहीं, इस पूरे मामले पर फिलहाल एसडीएम कार्यालय या जिला प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक सफाई सामने नहीं आई है।
Report By: Sanjay Kumar
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