Lakhimpur Kheri: उत्तर प्रदेश सरकार जहाँ एक ओर प्रदेश को ‘सुरक्षित प्रदेश’ बनाने का संकल्प दोहरा रही है, वहीं लखीमपुर खीरी के मोहम्मदी क्षेत्र स्थित धर्मपुर से आई एक खबर ने सुरक्षा व्यवस्था की दरारों को उजागर कर दिया है। एक ईंट भट्ठे पर मजदूरी करने वाले परिवार की बेटी के साथ हुई छेड़छाड़ की घटना ने स्थानीय पुलिस की सक्रियता पर हल्के सवालिया निशान लगा दिए हैं।
आखिर क्यों बेखौफ हैं शोहदे?
मामला तब गंभीर हो जाता है जब अपराधी दिन-दहाड़े या शाम के धुंधलके में ऐसी वारदातों को अंजाम देने की जुर्रत करते हैं। धर्मपुर में शौच के लिए गई युवती को निशाना बनाने की कोशिश यह बताती है कि ग्रामीण इलाकों में ‘पुलिस का इकबाल’ वैसा नहीं है जैसा होना चाहिए। दबंग द्वारा युवती का हाथ पकड़कर खींचने की कोशिश करना इस बात का प्रमाण है कि अपराधियों के मन में सजा का खौफ कम हो रहा है।

व्यवस्था पर उठते कुछ ‘असहज’ सवाल
हालांकि प्रशासन की मंशा पर संदेह नहीं है, लेकिन धरातल की हकीकत कुछ कड़वे सवाल पूछती है। गश्त की खानापूर्ति? क्या धर्मपुर जैसे संवेदनशील भट्ठा क्षेत्रों में पुलिस की गाड़ी केवल मुख्य सड़कों तक सीमित है? देरी से कार्रवाई: घटना के बाद भी आरोपी का पकड़ से बाहर होना, कहीं न कहीं स्थानीय स्तर पर पुलिस की ‘सुस्ती’ को दर्शाता है। अभियान बनाम हकीकत: कागजों पर चलने वाला ‘मिशन शक्ति’ धर्मपुर की उन बेटियों तक क्यों नहीं पहुँच पा रहा, जिन्हें आज भी बुनियादी जरूरतों के लिए असुरक्षित रास्तों से गुजरना पड़ता है?
प्रशासन के लिए एक कड़ा संदेश
स्थानीय ग्रामीणों में इस बात को लेकर हल्का आक्रोश है कि यदि समय रहते कड़ी कार्रवाई नहीं हुई, तो ऐसे तत्वों के हौसले और बढ़ेंगे। प्रशासन को समझना होगा कि केवल जागरूकता पोस्टरों से महिलाएं सुरक्षित नहीं होंगी, बल्कि इसके लिए ‘ग्राउंड जीरो’ पर सख्त कार्रवाई और अपराधियों के मन में कानून का डर पैदा करना अनिवार्य है।
Report By: Sanjay Kumar
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