UGC New Rules: यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (यूजीसी) द्वारा लागू किए गए नए समता नियमों को लेकर देशभर में विवाद गहराता जा रहा है। इसी बीच मशहूर कवि डॉ. कुमार विश्वास ने भी इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर स्व. रमेश रंजन की एक कविता साझा करते हुए यूजीसी एक्ट के विरोध में अपने विचार व्यक्त किए। इस पोस्ट में उन्होंने हैशटैग UGC Rollback का भी इस्तेमाल किया।
डॉ. कुमार विश्वास ने अपनी पोस्ट में लिखा:
“चाहे तिल लो या ताड़ लो राजा,
राई लो या पहाड़ लो राजा,
मैं अभागा ‘सवर्ण’ हूं मेरा,
रोंआ-रोंआ उखाड़ लो राजा…”
कुमार विश्वास ने कविता के माध्यम से विरोध जताया
इस कविता के माध्यम से उन्होंने सवर्ण समाज की भावनाओं को उजागर किया और नए नियमों के खिलाफ बढ़ते विरोध पर अपनी प्रतिक्रिया दी। वास्तव में, यूजीसी के नए समता नियमों के विरोध में सवर्ण समाज ने खुले तौर पर विरोध शुरू कर दिया है। सरकार भी इस मामले में सक्रिय हो गई है और विवाद का समाधान निकालने के लिए मंथन शुरू कर दिया गया है।
“चाहे तिल लो या ताड़ लो राजा,
राई लो या पहाड़ लो राजा,
मैं अभागा ‘सवर्ण’ हूँ मेरा,
रौंया-रौंया उखाड़ लो राजा ..।”😢🙏
(स्व० रमेश रंजन) #UGC_RollBack pic.twitter.com/VmsZ2xPiOL— Dr Kumar Vishvas (@DrKumarVishwas) January 27, 2026
UGC New Rules: धरने के बाद नियमों में सुप्रीम कोर्ट से बदलाव
विरोध तब और तेज हो गया जब बरेली के पीसीएस अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री ने नियमों के विरोध में इस्तीफा दे दिया और बरेली जिलाधिकारी कार्यालय के बाहर धरने पर बैठ गए। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद यूजीसी ने समता नियमों में कुछ बदलाव किए हैं। इन बदलावों को लेकर ही विरोध और चर्चा बढ़ गई है।
UGC New Rules: भेदभाव की परिभाषा में विस्तार
2026 के नियमों में भेदभाव की परिभाषा को पहले से ज्यादा सख्त और विस्तृत किया गया है। यह अब 2012 के नियमों की तुलना में अधिक व्यापक है। जाति आधारित भेदभाव की परिभाषा का दायरा बढ़ाया गया है और अब इसमें एससी, एसटी के साथ-साथ ओबीसी छात्रों और कर्मचारियों को भी शामिल किया गया है।
झूठी शिकायतों पर दंड हटाया गया
पहले के 2012 के नियमों में झूठी शिकायतों पर जुर्माना और दंड के प्रावधान थे। नए नियमों में यह हटाया गया है ताकि वास्तविक पीड़ित बिना डर के शिकायत दर्ज कर सकें।
सख्त निगरानी तंत्र
प्रत्येक उच्च शिक्षा संस्थान को अब समता दस्ते और समता दूत नियुक्त करना अनिवार्य होगा। भेदभाव के मामलों पर सात दिनों के भीतर कार्रवाई और रिपोर्ट दर्ज करनी होगी। यदि मामला गंभीर हो, तो पुलिस को तुरंत सूचित किया जाएगा।
संस्थानों की जिम्मेदारी
यदि कोई संस्थान इन नियमों का पालन नहीं करता है, तो यूजीसी उसके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई कर सकता है। इसमें डिग्री, वित्तीय मदद या ऑनलाइन कोर्सों पर रोक लगाना शामिल है।
इन नियमों और उनके बदलावों ने शिक्षा जगत में नए विवाद को जन्म दिया है। अब यह देखना बाकी है कि सरकार और यूजीसी इस विवाद का हल कैसे निकालते हैं और छात्रों तथा कर्मचारियों के लिए संतुलित समाधान कैसे पेश करते हैं।







