UGC Act: अमरोहा में ब्राह्मण समाज ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा प्रस्तावित नए नियमों और ड्राफ्ट रेगुलेशन को समाज विरोधी और असंवैधानिक बताते हुए प्रधानमंत्री को संबोधित सात सूत्रीय मांगपत्र जिलाधिकारी निधि गुप्ता को सौंपा। ब्राह्मण सभा ने कहा है कि यदि कोई कानून या बिल एकपक्षीय होगा, तो उसका दीर्घकालीन सामाजिक विभाजन पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा। उनका आरोप है कि इस तरह के नियम एससी/एसटी/ओबीसी छात्रों को भी अन्य छात्रों से वैमनस्य की स्थिति में धकेल सकते हैं। उन्होंने कहा कि भारत का संविधान समानता, प्रतिनिधित्व और सामाजिक न्याय पर आधारित है और किसी भी नीति या समिति का बहुवर्गीय और समावेशी होना अनिवार्य है।
असमानता और भेदभाव उत्पन्न
मंगलवार को ब्राह्मण सभा के अध्यक्ष पवन कौशिक और महामंत्री मनु शर्मा एडवोकेट के नेतृत्व में समाज के पदाधिकारियों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रधानमंत्री को संबोधित यूजीसी बिल के विरुद्ध सात सूत्रीय मांग पत्र सौंपा। मांगपत्र में बताया गया कि UGC के नए नियम देश की उच्च शिक्षा प्रणाली में असमानता और भेदभाव उत्पन्न कर सकते हैं।
साथ ही, उन्होंने कहा कि नीति निर्धारण और निर्णय समितियों में सामाजिक संतुलन और विविध प्रतिनिधित्व का अभाव है, जिससे कानून की निष्पक्षता पर प्रश्न उठते हैं। यह संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 के खिलाफ है और समस्त सवर्ण समाज के छात्रों के भविष्य के साथ भेदभाव करता है।
UGC Act: नियमों को तत्काल प्रभाव से निरस्त की मांग
ब्राह्मण सभा ने मांग की कि इन नियमों को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए। इस अवसर पर ब्राह्मण समाज के वरिष्ठ सदस्य और पदाधिकारी जैसे योगेंद्र कुमार शर्मा, सुशील शर्मा, सुभाष शर्मा, पवन शर्मा, राजीव शर्मा, शशांक त्रिवेदी, विकास व्यास, अवनीश शर्मा, खेमकरण शर्मा, प्रतुल शर्मा, नवदीप भारद्वाज, पीयूष शर्मा, राजन शर्मा, मोहित शर्मा और गौरव दीक्षित आदि उपस्थित रहे।







