Bengal Election 2026: पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन- एसआईआर) के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी ने आरोप लगाया है कि वोटर वेरिफिकेशन प्रक्रिया में हेराफेरी करने के लिए प्रशासनिक अधिकारियों को गैर-कानूनी निर्देश दिए जा रहे हैं। उन्होंने इसे तृणमूल कांग्रेस और राज्य प्रशासन के बीच गठजोड़ करार दिया है।
व्हाट्सएप मैसेज से खुलासा होने का दावा
सुवेंदु अधिकारी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक कथित स्क्रीनशॉट साझा करते हुए कहा कि साउथ 24 परगना के अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट (एडीएम) की ओर से भेजे गए व्हाट्सएप संदेश ने एसआईआर प्रक्रिया के पीछे की वास्तविकता उजागर कर दी है। उन्होंने लिखा कि यह संदेश टीएमसी-ममता प्रशासन के गठजोड़ की “चौंकाने वाली और बेशर्म” तस्वीर पेश करता है।
Bengal Election 2026: ‘नॉट वेरिफाइड’ पर क्लिक न करने के निर्देश
भाजपा नेता के अनुसार, कथित मैसेज में अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे किसी भी स्थिति में ‘नॉट वेरिफाइड’ विकल्प पर क्लिक न करें। यदि किसी तरह का संदेह हो तो वरिष्ठ अधिकारियों या ओसी इलेक्शन से संपर्क किया जाए, लेकिन हर हाल में प्रतिदिन 3000 वेरिफिकेशन का लक्ष्य पूरा किया जाए।
वेरिफिकेशन में जानबूझकर हेराफेरी का आरोप
सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि यह वेरिफिकेशन प्रक्रिया में सीधे तौर पर हेराफेरी करने का गैर-कानूनी आदेश है। अधिकारियों को जानबूझकर अपूर्ण या संदिग्ध मामलों में भी ‘नॉट वेरिफाइड’ न लगाने को कहा जा रहा है। उनका आरोप है कि यह प्रशासनिक अधिकार का खुला दुरुपयोग है, जिसका उद्देश्य अयोग्य मतदाताओं और फर्जी एंट्री को बचाना है।
Bengal Election 2026: चुनाव आयोग के आदेशों को कमजोर करने का दावा
नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी सरकार भारत के चुनाव आयोग के साफ और पारदर्शी मतदाता सूची तैयार करने के निर्देशों को कमजोर करने के लिए जिला प्रशासन का इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने कहा कि टीएमसी इस बात से आशंकित है कि वास्तविक एसआईआर प्रक्रिया उनके कथित लंबे समय से चल रहे चुनावी अनियमितताओं को उजागर कर देगी।
चुनाव आयोग से उच्च-स्तरीय जांच की मांग
सुवेंदु अधिकारी ने चुनाव आयोग से मांग की कि वह इस तरह के अनौपचारिक प्रशासनिक दबाव के पैटर्न का तत्काल संज्ञान ले। उन्होंने एडीएम और ऐसे सभी अधिकारियों की भूमिका की उच्च-स्तरीय जांच की मांग की, जो इन कथित गैर-कानूनी निर्देशों को जारी करने या उनका पालन करने में शामिल हैं। साथ ही, सत्ताधारी पार्टी के इशारे पर लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कमजोर करने वाले दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी और अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की।
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