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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को राम मंदिर दर्शन का निमंत्रण, मार्च में अयोध्या दौरे के संकेत

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को श्रीराम मंदिर दर्शन का निमंत्रण दिया गया है। ट्रस्ट को मार्च में उनके अयोध्या आगमन की उम्मीद है। इस दौरान रामायण की दुर्लभ पांडुलिपियों और मंदिर की सांस्कृतिक योजना पर भी जानकारी साझा की गई।
राम मंदिर ट्रस्ट ने दिया आमंत्रण

Ayodhya Visit: श्री राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने शुक्रवार को बताया कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के मार्च महीने में अयोध्या आने की संभावना है। इस दौरान वह भगवान श्रीराम के दर्शन और पूजा कर सकती हैं। हालांकि इस यात्रा को लेकर अब तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन नृपेंद्र मिश्रा के अनुसार राष्ट्रपति ने अनौपचारिक तौर पर इस दौरे के लिए सहमति जता दी है।

नृपेंद्र मिश्रा का बयान: मार्च में तय हो सकती है तारीख

मीडिया से बातचीत में नृपेंद्र मिश्रा ने बताया कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के प्रतिनिधियों ने हाल ही में राष्ट्रपति से मुलाकात की थी। इस दौरान उन्हें अयोध्या आने के लिए औपचारिक निमंत्रण सौंपा गया। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट को उम्मीद है कि राष्ट्रपति अपने कार्यक्रम को देखते हुए मार्च महीने में किसी तारीख को तय कर सकती हैं।

नृपेंद्र मिश्रा ने स्पष्ट किया कि फिलहाल ट्रस्ट को कोई आधिकारिक सूचना प्राप्त नहीं हुई है, लेकिन अंदरूनी तौर पर यह जानकारी मिली है कि राष्ट्रपति इस यात्रा के लिए राजी हो गई हैं।

Ayodhya Visit: राम मंदिर ट्रस्ट ने दिया आमंत्रण
राम मंदिर ट्रस्ट ने दिया आमंत्रण

Ayodhya Visit: 400 साल पुरानी पांडुलिपि बनेगी आस्था का प्रतीक

इस दौरान उन्होंने राम मंदिर से जुड़ी एक और अहम जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि मंदिर परिसर में रामायण से संबंधित प्राचीन पांडुलिपियों को संरक्षित करने की योजना बनाई जा रही है। इसी क्रम में केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय ने ट्रस्ट को एक बेहद दुर्लभ, करीब 400 साल पुरानी पांडुलिपि भेंट की है। इस पांडुलिपि में महर्षि वाल्मीकि से जुड़ा साहित्य प्राचीन संस्कृत लिपि में लिखा हुआ है।

नृपेंद्र मिश्रा ने बताया कि यह पांडुलिपि पहले राष्ट्रपति भवन संग्रहालय को दी गई थी, लेकिन जब विश्वविद्यालय को जानकारी मिली कि अयोध्या में राम मंदिर की दूसरी मंजिल पर रामायण साहित्य के लिए एक विशेष स्थान बनाया जा रहा है, तो ट्रस्ट के अनुरोध पर इसे स्थायी रूप से मंदिर को देने का फैसला किया गया।

प्राण प्रतिष्ठा के बाद उमड़ी श्रद्धालुओं की ऐतिहासिक भीड़

उन्होंने यह भी कहा कि ट्रस्ट देश की विभिन्न भाषाओं में उपलब्ध प्राचीन रामायण ग्रंथों और वाल्मीकि के अनुवादों को मंदिर परिसर में सुरक्षित रखने की योजना पर काम कर रहा है। इसका उद्देश्य अयोध्या को धार्मिक ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक विरासत का भी एक प्रमुख केंद्र बनाना है।

गौरतलब है कि राम मंदिर का प्राण प्रतिष्ठा समारोह 22 जनवरी 2024 को आयोजित किया गया था। इस भव्य आयोजन में करीब 7,000 विशेष अतिथि शामिल हुए थे, जिनमें संत-महात्मा, उद्योग जगत की प्रमुख हस्तियां, खिलाड़ी और फिल्मी दुनिया से जुड़े लोग मौजूद थे। इस समारोह की अध्यक्षता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की थी और इसे देश-विदेश में व्यापक स्तर पर देखा गया।

नृपेंद्र मिश्रा ने आगे बताया कि प्राण प्रतिष्ठा के बाद मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। अगले ही दिन लगभग तीन लाख भक्त भगवान श्रीराम के बाल रूप को दर्शाने वाली राम लला की नई प्रतिमा के दर्शन के लिए मंदिर पहुंचे। इसके अलावा इतनी ही संख्या में श्रद्धालु अपनी बारी का इंतजार करते नजर आए।

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