Lakhimpur Kheri: लखीमपुर खीरी जनपद की तहसील गोला गोकर्णनाथ के अंतर्गत आने वाले ब्लॉक बांकेगंज से सरकारी भ्रष्टाचार की एक ऐसी तस्वीर सामने आ रही है, जो योगी सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति को खुली चुनौती दे रही है। यहाँ स्थित किसान सहकारी समिति के कर्मचारी और एमडी (MD) मिलकर न केवल सरकार की योजनाओं को पलीता लगा रहे हैं, बल्कि किसानों के हक पर भी डाका डाल रहे हैं।
6 वर्षों से एक ही जगह जमा है सचिव का ‘डेरा’
बांकेगंज समिति में नियमों को ताक पर रखकर भ्रष्टाचार का सिंडिकेट चलाया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, यहाँ तैनात सचिव पिछले लगभग 6 वर्षों से एक ही स्थान पर अपनी जड़ें जमाए बैठा है। लंबे समय तक एक ही केंद्र पर जमे रहने के कारण सचिव और स्थानीय बिचौलियों के बीच गहरा गठजोड़ बन चुका है, जिससे आम किसानों की सुनवाई पूरी तरह बंद हो गई है। हैरानी की बात यह है कि सहकारी समिति की यूरिया किसानों के खेतों तक पहुँचने के बजाय मार्केट के अंदर निजी दुकानों पर पहुँच रही है। बताया जा रहा है कि बांकेगंज के कुछ खाद्य विक्रेताओं ने मार्केट के अंदर दुकानें किराए पर ले रखी हैं, जहाँ से यूरिया की कालाबाजारी ऊँचे दामों पर की जा रही है। सरकारी यूरिया को इन निजी विक्रेताओं को बेचकर सरकारी कर्मचारी अपनी जेबें भर रहे हैं।
Lakhimpur Kheri: धान खरीद में ‘कागजी’ खेल
धान क्रय केंद्र को लेकर जो खुलासा हुआ है वह और भी चौंकाने वाला है। आरोप है कि किसान सहकारी समिति बांकेगंज में धान की खरीद केवल कागजों पर चल रही है। धरातल पर केंद्र पर एक दिन भी वास्तविक खरीदारी नहीं हुई। किसानों का कहना है कि अगर इस खरीद की उच्च स्तरीय जांच की जाए, तो लाखों रुपये का ‘कागजी धान’ घोटाला सामने आ सकता है।
घोटाले के प्रमुख बिंदु जिन पर उठ रहे सवाल…
* दस्तावेजों में हेराफेरी: रिकॉर्ड के अनुसार सैकड़ों क्विंटल खाद बांटी जा चुकी है, लेकिन हकीकत में वह निजी गोदामों में डंप है।
* अंगूठा लगवाया, खाद नहीं दी: कई किसानों ने आरोप लगाया है कि समिति पर उनसे ई-पॉस मशीन पर अंगूठा तो लगवा लिया गया, लेकिन खाद उपलब्ध नहीं कराई गई।
* अधिकारियों की चुप्पी: इतना बड़ा मामला उजागर होने के बाद भी संबंधित उच्चाधिकारी मौन साधे हुए हैं, जिससे उनकी कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं।
एक ओर भाजपा सरकार किसानों की आय दोगुनी करने और पारदर्शिता का दावा कर रही है, वहीं बांकेगंज के ये सरकारी कर्मचारी सरकार की छवि को धूमिल करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस ‘कागजी खरीद’ और ‘यूरिया कांड’ की जांच कर दोषियों पर क्या कार्यवाही करता है।
Report BY: संजय कुमार
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