Nirmala Sitharaman: तमिलनाडु भाजपा के प्रवक्ता एएनएस प्रसाद ने रविवार को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की खुलकर सराहना की। उन्होंने उन्हें “तमिल मिट्टी की शान” बताया और कहा कि वह लगातार नौवीं बार केंद्रीय बजट पेश करने जा रही हैं। यह उपलब्धि भारत के संसदीय इतिहास में किसी भी महिला वित्त मंत्री के लिए पहली बार होने जा रही है।
तमिल संस्कृति और राष्ट्रीय जिम्मेदारी का संतुलन
एएनएस प्रसाद ने सीतारमण को “मां तमिल की बेटी और हर तमिल की बहन” बताते हुए कहा कि वह तमिल सांस्कृतिक परंपराओं और राष्ट्रीय जिम्मेदारियों के बीच संतुलन की मिसाल हैं। उनके अनुसार, सीतारमण के बजट भाषण सिर्फ आर्थिक नीतियों तक सीमित नहीं होते, बल्कि उनमें तमिल सभ्यता और संस्कृति की झलक भी साफ दिखाई देती है।

उन्होंने बताया कि वित्त मंत्री अपने भाषणों में अक्सर तिरुक्कुरल और प्राचीन तमिल ग्रंथों का उल्लेख करती हैं। प्रसाद ने कहा कि जब सीतारमण देश की आर्थिक दिशा तय करती हैं और साथ ही तमिल साहित्य की प्राचीन सीख को संसद में सामने लाती हैं, तो यह क्षेत्रीय विरासत और राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के बीच एक मजबूत तालमेल को दर्शाता है।
Nirmala Sitharaman: बजट भाषणों में झलकती तमिल विरासत
प्रसाद के अनुसार, तमिल साहित्य में मौजूद नैतिक और दार्शनिक सोच को संसद में स्थान देकर सीतारमण पूरे देश को यह संदेश देती हैं कि भारत की आर्थिक प्रगति उसकी प्राचीन नैतिक परंपराओं से भी प्रेरणा ले सकती है।
इस ऐतिहासिक मौके पर बात करते हुए प्रसाद ने कहा कि निर्मला सीतारमण देश की पहली महिला होंगी जो नौ बार केंद्रीय बजट पेश करेंगी। उन्होंने इसे नारी शक्ति के बढ़ते प्रभाव का प्रतीक बताया और कहा कि यह उपलब्धि दुनिया को यह साफ संदेश देती है कि भारत महिला नेतृत्व और लोकतांत्रिक निरंतरता के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

तमिलनाडु के लिए सामूहिक गर्व का क्षण
प्रसाद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने ऐसा माहौल बनाया है, जहां काबिल महिला नेताओं को देश की अहम जिम्मेदारियां सौंपी जाती हैं। उनके अनुसार, वित्त मंत्री के रूप में सीतारमण का लंबा कार्यकाल प्रधानमंत्री के भरोसे, उनके अनुशासन, क्षमता और समावेशी नेतृत्व को दर्शाता है, साथ ही इससे तमिलनाडु की प्रतिभा को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है।
तमिलनाडु के लिए इसे गर्व का सामूहिक क्षण बताते हुए प्रसाद ने कहा कि तमिल भाषा और संस्कृति की धरती से निकलकर देश की आर्थिक नीतियों के शीर्ष पद तक पहुंचना यह साबित करता है कि क्षेत्रीय प्रतिभा किस तरह राष्ट्रीय शासन को मजबूत बनाती है।
अंत में उन्होंने कहा कि यह बजट प्रस्तुति सिर्फ एक आर्थिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि तमिल विरासत, महिला सशक्तीकरण और भारत की लोकतांत्रिक शक्ति का संगम है। उनके अनुसार, यह अवसर प्राचीन ज्ञान और आधुनिक शासन को जोड़ने वाला एक ऐतिहासिक अध्याय साबित होगा।
ये भी पढ़ें…आर्थिक त्यौहार 2026: संसद में तय होगा आम आदमी से लेकर भारत 2047 तक का सफर







