4 February Panchang: 4 फरवरी को फाल्गुन कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि है, और इस दिन बुधवार पड़ रहा है। तृतीया तिथि और बुधवार का यह संयोग भगवान गणेश को समर्पित माना जाता है। इस दिन नया काम शुरू करना, पढ़ाई, व्यापार या किसी नई योजना की शुरुआत शुभ मानी जाती है, लेकिन इसके लिए राहुकाल और अन्य अशुभ समय से बचना जरूरी होता है। इसलिए किसी भी कार्य से पहले पंचांग देखना महत्वपूर्ण माना गया है।
गणपति पूजा का विशेष महत्व
दृक पंचांग के अनुसार, 4 फरवरी को फाल्गुन कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि रात 12 बजकर 9 मिनट से शुरू होकर 5 फरवरी की सुबह तक रहेगी। बुधवार का दिन विशेष रूप से भगवान गणेश की पूजा के लिए उत्तम माना गया है। मान्यता है कि इस दिन गणपति की आराधना करने से बुद्धि का विकास होता है, कार्यों में सफलता मिलती है और बाधाएं दूर होती हैं।

4 February Panchang: सूर्योदय से चंद्र गोचर विवरण
पंचांग के अनुसार, इस दिन सूर्योदय सुबह 7 बजकर 8 मिनट पर और सूर्यास्त शाम 6 बजकर 3 मिनट पर होगा। पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र रात 10 बजकर 12 मिनट तक रहेगा, इसके बाद उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र शुरू होगा। अतिगण्ड योग 5 फरवरी की रात 1 बजकर 5 मिनट तक प्रभावी रहेगा। वणिज करण दोपहर 12 बजकर 19 मिनट तक रहेगा, जिसके बाद विष्टि करण लगेगा। इस दिन चंद्रमा सिंह राशि में गोचर करेंगे।
दिन के शुभ मुहूर्त
शुभ समय की बात करें तो ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5 बजकर 23 मिनट से 6 बजकर 15 मिनट तक रहेगा। विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 24 मिनट से 3 बजकर 8 मिनट तक माना गया है। इसके अलावा गोधूलि मुहूर्त शाम 6 बजे से 6 बजकर 26 मिनट तक रहेगा। वहीं, अमृत काल दोपहर 3 बजकर 48 मिनट से शाम 5 बजकर 24 मिनट तक है, जिसे बहुत ही शुभ समय माना गया है।

4 February Panchang: अशुभ समय से बचाव जरूरी
किसी भी शुभ कार्य से पहले अशुभ समय का ध्यान रखना भी जरूरी होता है। इस दिन राहुकाल दोपहर 12 बजकर 35 मिनट से 1 बजकर 57 मिनट तक, यमगण्ड सुबह 8 बजकर 30 मिनट से 9 बजकर 51 मिनट तक और गुलिक काल सुबह 11 बजकर 13 मिनट से दोपहर 12 बजकर 35 मिनट तक रहेगा। इन समयों में नए कार्य शुरू करने से बचना चाहिए।
बुधवार की पूजा विधि और जाप
बुधवार का दिन केवल गणपति को ही नहीं, बल्कि बुध ग्रह को भी समर्पित होता है। इस दिन विधि-विधान से पूजा करते हुए गणेश जी को दूर्वा, लाल फूल, मोदक, लड्डू और पान अर्पित करना शुभ माना गया है। साथ ही ‘गं गणपतये नमः’ मंत्र, द्वादश गणेश नाम, संकट नाशन स्तोत्र और गणेश अथर्वशीर्ष का पाठ करने से विशेष लाभ प्राप्त होता है।
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