Uttar Pradesh: उत्तर प्रदेश के मथुरा स्थित विश्वप्रसिद्ध बांके बिहारी मंदिर में प्रस्तावित कॉरिडोर और परिसर विकास कार्य को लेकर नया विवाद सामने आया है। मंदिर में स्टील रेलिंग लगाने का ठेका एक मुस्लिम ठेकेदार को दिए जाने के बाद स्थानीय संत समाज और ब्रजवासियों में नाराज़गी देखी जा रही है।इस मुद्दे पर साधु-संतों ने कड़ा विरोध जताते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर ठेका रद्द करने और पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है।
Uttar Pradesh: काम शुरू होने से पहले ही उठा विरोध
जानकारी के मुताबिक, मंदिर परिसर और कॉरिडोर क्षेत्र में स्टील रेलिंग लगाने का प्रस्ताव है। यह कार्य एक निजी निर्माण कंपनी के माध्यम से कराया जाना है। हालांकि, जैसे ही ठेकेदार की पहचान सामने आई, संत समाज ने इस पर आपत्ति दर्ज कराई।विवाद बढ़ता देख फिलहाल काम शुरू नहीं किया गया है। अभी तक न तो प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान आया है और न ही संबंधित ठेकेदार की प्रतिक्रिया सामने आई है।
Uttar Pradesh: संतों ने CM को लिखा पत्र, जताई कड़ी आपत्ति
स्थानीय संत फलाहारी महाराज की ओर से मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि बांके बिहारी धाम ब्रजभूमि की आस्था का केंद्र है, जहां श्रद्धालुओं की भावनाएं सर्वोपरि हैं। पत्र में ठेके को लेकर गहरी नाराज़गी जाहिर करते हुए इसे सनातन परंपराओं के खिलाफ बताया गया है।संतों का कहना है कि जब बड़ी संख्या में सनातनी ठेकेदार उपलब्ध हैं, तो फिर बाहरी समुदाय के व्यक्ति को यह जिम्मेदारी क्यों सौंपी गई।
जांच और ठेका रद्द करने की मांग तेज
विरोध कर रहे संतों और स्थानीय लोगों का आरोप है कि ठेका प्रक्रिया पारदर्शी नहीं रही और ठेकेदार ने कथित रूप से अपनी पहचान छिपाकर काम हासिल किया। इसी आधार पर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की जा रही है।साथ ही यह भी कहा जा रहा है कि मंदिर जैसे संवेदनशील और धार्मिक स्थल पर कार्य करने वालों की पृष्ठभूमि को लेकर विशेष सावधानी बरती जानी चाहिए।
Uttar Pradesh: स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं का भी समर्थन
इस मुद्दे को लेकर केवल संत समाज ही नहीं, बल्कि स्थानीय निवासी, पुजारी और मंदिर आने वाले श्रद्धालु भी नाराज़गी जाहिर कर रहे हैं। उनका कहना है कि मंदिर से जुड़ा हर फैसला आस्था और परंपरा को ध्यान में रखकर लिया जाना चाहिए।
अब प्रशासन की प्रतिक्रिया का इंतजार
फिलहाल यह मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। सभी की निगाहें अब राज्य सरकार और जिला प्रशासन की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं कि इस विवाद पर क्या कदम उठाया जाता है और क्या ठेके की प्रक्रिया की जांच होती है या नहीं।
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