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कैसे योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन से 47 हज़ार घरेलू महिलाएं आत्मनिर्भर बन हुईं लखपति ?

कैसे योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन से 47 हज़ार घरेलू महिलाएं आत्मनिर्भर बन हुईं लखपति ?

Uttar Pradesh: उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दूरदर्शी मार्गदर्शन में ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक स्थिति में अभूतपूर्व बदलाव देखने को मिल रहा है। गोरखपुर मंडल की लगभग 47 हजार महिलाएं श्री बाबा गोरखनाथ कृपा मिल्क प्रोड्यूसर ऑर्गनाइजेशन (एमपीओ) से जुड़कर अपने पैरों पर खड़ी हो रही हैं केवल दो साल और दो महीनों में यह संस्था 192 करोड़ रुपए का टर्नओवर हासिल कर चुकी है। इस अवधि में एमपीओ ने अपनी महिला शेयरहोल्डर्स को 155 करोड़ रुपए से अधिक का भुगतान किया है। एमपीओ की सदस्य महिलाएं प्रतिदिन डेढ़ लाख लीटर से अधिक दूध का संग्रह करती हैं, जिससे उन्हें नियमित और स्थिर आय प्राप्त होती है।

Uttar Pradesh: दो साल में 192 करोड़ का टर्नओवर लखपति दीदियों की बढ़ती संख्या

एमपीओ से जुड़ी करीब दो हजार महिलाएं लखपति दीदियों की श्रेणी में आ चुकी हैं। अन्य महिलाएं भी औसतन प्रति माह 7-8 हजार रुपए की आमदनी घर बैठे कमा रही हैं। यह दिखाता है कि छोटा व्यवसाय भी बड़ी आत्मनिर्भरता की राह खोल सकता है श्री बाबा गोरखनाथ कृपा एमपीओ गोरखपुर, महराजगंज, देवरिया और कुशीनगर जिलों में सक्रिय है। एमपीओ के 500 से अधिक मिल्क पूलिंग पॉइंट्स के माध्यम से दूध की आपूर्ति मुख्य रूप से मदर डेयरी को की जाती है।

Uttar Pradesh: मुख्यमंत्री योगी के विजन का असर

एमपीओ की यह सफलता सीधे तौर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन और प्रेरणा का परिणाम है। सीईओ धनराज साहनी के अनुसार, मुख्यमंत्री के दूरदर्शी दृष्टिकोण ने ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर और समृद्ध बनने की दिशा में आगे बढ़ाया है। दीपावली पर एमपीओ ने महिला शेयरहोल्डर्स को 53.16 लाख रुपये की निष्ठा प्रोत्साहन राशि और लाभांश वितरित किया। इस लाभांश की दर 8 रुपये प्रति शेयर है, जबकि शेयर का अंकित मूल्य 100 रुपये है। यह वितरण साबित करता है कि एमपीओ न केवल आर्थिक लाभ दे रहा है बल्कि महिलाओं के मनोबल और व्यवसायिक योगदान को भी मान्यता दे रहा है।

बुंदेलखंड की मिसाल पर तैयार

श्री बाबा गोरखनाथ कृपा एमपीओ की स्थापना बुंदेलखंड की बलिनी मिल्क प्रोड्यूसर कंपनी के मॉडल पर की गई है, और अब इसके परिणाम भी उसी दिशा में दिखाई दे रहे हैं। यह साबित करता है कि सही मार्गदर्शन, स्थिर योजना और महिलाओं की भागीदारी से ग्रामीण विकास में चमत्कार संभव है।

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