Torsa River Pollution: अलीपुरद्वार जिले में भारत और भूटान सीमा के पास स्थित जयगांव शहर में बहने वाली तोरसा नदी गंभीर प्रदूषण की चपेट में आ गई है। सरकारी लापरवाही के कारण नदी की स्थिति लगातार खराब होती जा रही है। तिब्बत की चाम्बी घाटी से निकलकर भूटान होते हुए उत्तर बंगाल में प्रवेश करने वाली यह नदी जलदापाड़ा राष्ट्रीय उद्यान जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र को भी जीवन देती है। लेकिन भारत में प्रवेश करते ही, जयगांव के पास इसका पानी प्रदूषित होने लगता है।

ठोस कचरे के कारण बढ़ा प्रदूषण
जयगांव, जो अलीपुरद्वार जिले का एकमात्र कॉस्मोपॉलिटन शहर है, भूटान सीमा से सटा हुआ है और यहां करीब एक लाख से अधिक लोग रहते हैं। विभिन्न समुदायों के लोग यहां साथ रहते हैं, लेकिन इतने वर्षों बाद भी यहां कोई पूर्ण रूप से विकसित ठोस कचरा प्रबंधन प्रणाली नहीं बन पाई है। इसका नतीजा यह है कि शहर के पश्चिमी हिस्से में, जहां तोरसा नदी भूटान से भारत में प्रवेश करती है, वहीं बड़ी मात्रा में कचरा और अपशिष्ट डाला जा रहा है। इससे नदी का पानी लगातार ज्यादा प्रदूषित होता जा रहा है, जिससे स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ रही है।

Torsa River Pollution: आगामी चुनाव में प्रदूषण मुद्दा बन सकता है
तोरसा नदी के कैचमेंट क्षेत्र और जयगांव शहर के समग्र विकास की जिम्मेदारी राज्य सरकार के अंतर्गत आने वाली जयगांव डेवलपमेंट अथॉरिटी पर है। आरोप है कि इसी अथॉरिटी के वाहनों से क्विंटल के हिसाब से कचरा सीधे नदी में फेंका जा रहा है। इससे यह सवाल खड़े हो रहे हैं कि जिम्मेदार संस्था अपने कर्तव्यों का सही ढंग से निर्वहन क्यों नहीं कर पा रही है। बढ़ते प्रदूषण को देखकर लोग पर्यावरण और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को लेकर चिंतित हैं।
जयगांव डेवलपमेंट अथॉरिटी का जवाब
आने वाले विधानसभा चुनाव में इस प्रदूषण के मुद्दे को लेकर कालचिनी विधानसभा क्षेत्र में भगवा खेमे की ओर से आक्रामक राजनीति किए जाने के संकेत भी सामने आ रहे हैं।
वहीं, जयगांव डेवलपमेंट अथॉरिटी के चेयरमैन गंगा प्रसाद शर्मा ने इस मामले में सफाई देते हुए कहा कि फिलहाल कई जिम्मेदारियां स्वयंसेवी संगठनों के जरिए निभाई जा रही हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि बहुत जल्द जयगांव में ठोस कचरा प्रबंधन परियोजना शुरू की जाएगी, जिससे इस समस्या का समाधान निकाला जाएगा।
Report By: Pijush







