WPL 2026: हापुड़ अड्डा के गांधी नगर में पिता की छोटी सी पंडित जी छोले-भटूरे दुकान से निकलकर नंदिनी कौशिक ने क्रिकेट के मैदान पर इतिहास रच दिया है। साधारण परिवार की यह 18 वर्षीय दाहिनी हाथ की आक्रामक बल्लेबाज उत्तराखंड सीनियर महिला क्रिकेट टीम में चुनी गई हैं। आज से शुरू हो रहे राष्ट्रीय सीनियर महिला क्रिकेट टूर्नामेंट में वह चौकों छक्कों की बौछार कर विरोधियों को धूल चटा देंगी। नंदिनी की यह कामयाबी न सिर्फ व्यक्तिगत संघर्ष की कहानी है बल्कि सीमित संसाधनों में भी सपनों को उड़ान देने की मिसाल भी है।
क्रिकेट बना जीवन का केंद्र
नंदिनी तीन भाई-बहनों में सबसे छोटी हैं। फिलहाल हरिद्वार में कक्षा 12 की पढ़ाई कर रही हैं लेकिन क्रिकेट उनके जीवन का केंद्र बिंदु बन चुका है। पिछले छह सालों से वह क्रिकेट की कड़ी ट्रेनिंग में जुटे हुए हैं। मेरठ के बिजली बंबा बाईपास स्थित कराना क्रिकेट एकेडमी में कोच छाया कराना के सान्निध्य में उन्होंने बल्लेबाजी की बारीकियां सीखीं। कोच छाया बताती हैं नंदिनी शुरू से ही अनुशासित और मेहनती रही। दिन-रात प्रैक्टिस करतीं कभी शिकायत नहीं। आज उनका सीनियर टीम में चयन उसी लगन का फल है। नंदिनी मैदान पर उतरते ही आत्मविश्वास और आक्रामकता का प्रदर्शन करती हैं जो दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर देता है।

उनका आदर्श वनडे क्रिकेट में भारतीय कप्तान शुभमन गिल हैं। नंदिनी कहती हैं शुभमन सर की तरह जिम्मेदारी से बल्लेबाजी करना चाहती हूं। उनके स्टाइल से प्रेरणा लेती हूं।घरेलू क्रिकेट में उनका रिकॉर्ड लाजवाब है। उत्तराखंड प्रीमियर लीग (यूकेपीएल) के दो सीजन खेल चुकी हैं जहां लगातार रनों की बरसात कर चयनकर्ताओं का दिल जीत लिया। पिथौरागढ़ की ओर से खेलते हुए एक मैच में उन्होंने ताबड़तोड़ अर्धशतक ठोका। मल्टीडेज ट्रॉफी में सर्वाधिक रन बनाकर अवॉर्ड हासिल किया। अंडर-19 स्तर पर भी उत्तराखंड का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। इन उपलब्धियों ने उन्हें सीनियर टीम का टिकट दिला दिया।
WPL 2026: प्रेरणादायक है नंदिनी की कहानी
नंदिनी की कहानी इसलिए प्रेरणादायक है क्योंकि उनका परिवार आर्थिक तंगी से जूझता रहा। पिता पंडित जी हापुड़ अड्डे पर छोटी दुकान चलाते हैं जहां छोले-भटूरे की सुगंध से ग्राहक खिंचे चले आते हैं। सीमित कमाई के बावजूद उन्होंने बेटी के क्रिकेट सपनों को कभी रोका नहीं। पिता भावुक होकर कहते हैं बचपन से नंदिनी को क्रिकेट का जुनून था। समाज की क्या परवाह हमने उसे खुली छूट दी। आज सीनियर टीम में चयन देखकर आंखें नम हो जाती हैं। नंदिनी बताती हैं पढ़ाई और क्रिकेट को बैलेंस करना मुश्किल था लेकिन कभी हार नहीं मानी। पिता की दुकान पर आकर भी प्रैक्टिस का मन बनाती रही। मेरठ जैसे शहर से निकलकर उत्तराखंड की सीनियर टीम तक पहुंचना आसान नहीं। नंदिनी ने साबित कर दिया कि मेहनत और जुनून से कोई सपना असंभव नहीं। टूर्नामेंट में उनका प्रदर्शन न सिर्फ उत्तराखंड बल्कि पूरे उत्तर भारत के लिए गर्व का विषय बनेगा। स्थानीय क्रिकेट प्रेमी कहते हैं नंदिनी मेरठ की बेटी है लेकिन अब उत्तराखंड की शान। उसके चौके-छक्के देखने को बेताब हैं। कोच छाया ने भविष्यवाणी की राष्ट्रीय स्तर पर जल्द ही वह भारत की जर्सी ओढ़ेगी।
Report BY: यश मित्तल
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