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यूपी की राजधानी में ‘चाइनीज मांझे’ का तांडव! 24 घंटे में दूसरी बड़ी वारदात, रिटायर्ड फौजी लहूलुहान

चाइनीज मांझे

UP News: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में प्रतिबंधित चाइनीज मांझे का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। शासन और प्रशासन की तमाम पाबंदियों को धता बताकर बाजारों में बिक रहा यह ‘कातिल धागा’ अब लोगों की जान का दुश्मन बन चुका है। गोमतीनगर विस्तार इलाके में हुई ताजा घटना ने एक बार फिर सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। मात्र 24 घंटे के भीतर यह दूसरा बड़ा हादसा है, जिसने शहरवासियों को दहशत में डाल दिया है।

देश की रक्षा करने वाले फौजी को मांझे ने किया जख्मी

मिली जानकारी के अनुसार, ताजा मामला गोमतीनगर विस्तार इलाके का है। यहाँ एक रिटायर्ड फौजी अपनी दुपहिया गाड़ी से जा रहे थे, तभी अचानक हवा में तैरता हुआ चाइनीज मांझा उनके गले और चेहरे पर आकर फंस गया। जब तक वह कुछ समझ पाते, मांझे की धार ने उनकी ठोड़ी और होंठों को बुरी तरह काट दिया। फौजी गंभीर रूप से लहूलुहान हो गए। गनीमत रही कि समय रहते गाड़ी रुक गई और मांझा गर्दन की मुख्य नस तक नहीं पहुँचा, वरना परिणाम बेहद घातक हो सकते थे। आनन-फानन में उन्हें नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों को घाव भरने के लिए कई टांके लगाने पड़े। फिलहाल उनकी हालत खतरे से बाहर है, लेकिन इस घटना ने उनके परिवार और स्थानीय लोगों को झकझोर कर रख दिया है।

UP News: 24 घंटे पहले हुई थी एक युवक की मौत

राजधानी में दहशत का आलम यह है कि लोग अब दुपहिया वाहनों से निकलने में कतरा रहे हैं। गौरतलब है कि इस घटना से ठीक एक दिन पहले भी चाइनीज मांझे की चपेट में आने से एक युवक की दर्दनाक मौत हो गई थी। एक ही दिन के अंतराल पर लगातार हुई इन दो बड़ी घटनाओं ने यह साबित कर दिया है कि लखनऊ की सड़कों पर अब ‘यमराज’ धागे के रूप में घूम रहे हैं। संजय कुमार राठौर की इस विशेष रिपोर्ट के माध्यम से जनता प्रशासन से सवाल पूछ रही है कि प्रतिबंध के बावजूद बिक्री कैसे? जब चाइनीज मांझा पूरी तरह प्रतिबंधित है, तो यह थोक और फुटकर बाजारों में कैसे उपलब्ध है? पुलिस की चेकिंग कहाँ है? क्या पुलिस प्रशासन केवल कागजी आदेशों तक सीमित है? धरातल पर दुकानों की छापेमारी क्यों नहीं की जा रही? जिम्मेदारों पर कार्रवाई कब? मासूमों की जान जाने और लोगों के घायल होने का सिलसिला कब थमेगा?

गोमतीनगर विस्तार समेत लखनऊ के कई इलाकों में अब लोग अपने दोपहिया वाहनों के आगे सुरक्षा के लिए लोहे के तार या गार्ड लगवाने को मजबूर हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि शाम के वक्त पतंगबाजी के दौरान आसमान से गिरते ये धागे मौत का जाल बन जाते हैं। प्रशासन की ढिलाई के कारण दुकानदार चोरी-छिपे ऊंचे दामों पर यह मांझा बेच रहे हैं। रिटायर्ड फौजी के साथ हुए इस हादसे ने एक बार फिर चेतावनी दी है कि यदि अब भी कड़े कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले दिनों में और भी कई परिवार उजड़ सकते हैं। राजधानी में हो रही ये घटनाएं उत्तर प्रदेश के अन्य जिलों के लिए भी एक सबक हैं। लखीमपुर खीरी समेत प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी इस पर सख्ती की आवश्यकता है।

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