12 February Panchang: सनातन धर्म में पंचांग के पाँच मुख्य अंग-तिथि, नक्षत्र, योग, करण और वार—बहुत महत्वपूर्ण माने जाते हैं। ये हमारे रोजमर्रा के काम, पूजा-पाठ और किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत के लिए मार्गदर्शन देते हैं। 12 फरवरी को गुरुवार है, जिसे भगवान नारायण, माता पितांबरा (बगलामुखी) और देवगुरु बृहस्पति को समर्पित माना जाता है।
विशेष पूजा और मंत्र
गुरुवार को की जाने वाली विशेष पूजा और बृहस्पति मंत्र का जाप व्यक्ति के ज्ञान, बुद्धि और समृद्धि में वृद्धि करता है और जीवन में शुभता लाता है। यह दिन नारायण और बृहस्पति देव के साथ ही विजय की देवी माता पितांबरा को भी समर्पित है। सही विधि से की गई पूजा से जीवन के हर क्षेत्र में सफलता मिलती है और शत्रु नष्ट होते हैं। इस दिन नारायण और बृहस्पति की पूजा, पीले रंग की वस्तुएँ दान करना और केले का भोग चढ़ाना शुभ माना जाता है।

12 February Panchang: सूर्योदय और सूर्यास्त समय
दृक पंचांग के अनुसार 12 फरवरी को सूर्योदय सुबह 7:02 बजे और सूर्यास्त शाम 6:09 बजे होगा। तिथि कृष्ण पक्ष की दशमी है, जो दोपहर 12:22 बजे तक है, उसके बाद एकादशी शुरू हो जाएगी। नक्षत्र ज्येष्ठा है, जो दोपहर 1:42 बजे तक रहेगा, उसके बाद मूल नक्षत्र होगा। योग हर्षण है, जो अगले दिन सुबह 3:06 बजे तक रहेगा। करण विष्टि है, जो दोपहर 12:22 बजे तक है, उसके बाद बव करण रहेगा।
शुभ मुहूर्त और दान
शुभ मुहूर्त की बात करें तो ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5:19 बजे से 6:10 बजे तक है। अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:13 बजे से 12:58 बजे तक है। विजय मुहूर्त दोपहर 2:27 बजे से 3:11 बजे तक रहेगा और गोधूलि मुहूर्त शाम 6:06 बजे से 6:32 बजे तक है। ये सभी मुहूर्त किसी भी शुभ कार्य के लिए सर्वोत्तम माने जाते हैं।
अशुभ समय और राहुकाल
अशुभ समय का ध्यान रखना भी जरूरी है। नए काम इस दौरान शुरू नहीं करने चाहिए। राहुकाल दोपहर 1:59 बजे से 3:22 बजे तक, यमगंड सुबह 7:02 बजे से 8:25 बजे तक है। भद्रा सुबह 7:02 बजे से दोपहर 12:22 बजे तक है और गंड मूल पूरे दिन प्रभावी रहेगा। अशुभ समय में नई यात्रा, नए कार्य या शुभ संस्कार टालना चाहिए। वहीं, ब्रह्म मुहूर्त और अभिजित मुहूर्त में ध्यान, जप, दान और गुरु पूजा करना अत्यंत लाभकारी माना जाता है।







