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Rajpal Yadav: अगर अदालत न होती तो फांसी पर चढ़ा दिए जाते – राजपाल यादव का बड़ा बयान

Rajpal Yadav: अगर अदालत न होती तो फांसी पर चढ़ा दिए जाते – राजपाल यादव का बड़ा बयान

Rajpal Yadav: कॉमेडी के लिए मशहूर अभिनेता राजपाल यादव इन दिनों चेक बाउंस से जुड़े एक मामले में दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद हैं। इसी बीच उनका एक पुराना इंटरव्यू सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में वे अपने ऊपर लगे आरोपों को सिरे से खारिज करते नजर आ रहे हैं और फिल्म निर्माण से जुड़े विवाद पर खुलकर बात कर रहे हैं। वीडियो सामने आने के बाद एक बार फिर ‘अता पता लापता’ फिल्म और उससे जुड़े वित्तीय विवाद की चर्चा तेज हो गई है।

मैंने उधार नहीं लिया, उन्होंने खुद निवेश किया

वायरल क्लिप में राजपाल यादव से पूछा जाता है कि क्या उन्होंने एक व्यवसायी से फिल्म बनाने के लिए पांच करोड़ रुपये लिए थे। इस पर अभिनेता स्पष्ट शब्दों में कहते हैं कि उन्होंने किसी से उधार नहीं लिया था। उनके मुताबिक संबंधित व्यक्ति ने फिल्म में एक फाइनेंसर के रूप में निवेश किया था, क्योंकि वे अपने पोते को फिल्म में लॉन्च करना चाहते थे राजपाल का कहना है कि उन्हें कर्ज लेने वाला बताना गलत है। वे इसे निवेश का मामला बताते हैं, न कि निजी उधारी का।

Rajpal Yadav: डायरेक्शन को लेकर भी दी सफाई

इंटरव्यू के दौरान उनसे यह भी पूछा गया कि क्या वे फिल्म ‘अता पता लापता’ के निर्देशक थे। इस सवाल पर उन्होंने कहा कि वे मूल रूप से एक अभिनेता हैं और खुद को निर्देशक नहीं मानते। उन्होंने इसे एक रचनात्मक प्रयोग बताया।राजपाल ने उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे कोई खिलाड़ी कभी-कभी अपने खेल से हटकर कुछ नया आजमाता है, वैसे ही उन्होंने भी सिनेमा में एक अलग तरह का प्रयोग करने की कोशिश की थी। उनके मुताबिक यह प्रयास थिएटर की शैली को बड़े पर्दे पर उतारने का था।

Rajpal Yadav: कोर्ट ने सच को समझा

इस पूरे कानूनी मामले पर बात करते हुए राजपाल यादव ने कहा कि मामला अभी न्यायालय में विचाराधीन है और उन्हें न्याय प्रक्रिया पर पूरा भरोसा है। उनका कहना था कि अगर अदालत जैसी निष्पक्ष व्यवस्था न होती तो सामने वाला पक्ष उन्हें फांसी पर चढ़ा देने तक की कोशिश कर देता। उन्होंने कहा कि कोर्ट ने ही उन्हें बचाया है, क्योंकि न्यायालय में न तो भावनाओं का असर चलता है और न ही किसी तरह की एक्टिंग वहां सिर्फ सबूत और तथ्यों की ही अहमियत होती है। कई बार एक पक्ष के पास ढेर सारे दस्तावेज होते हैं और दूसरे के पास सिर्फ अपनी सच्चाई, लेकिन फैसला कानून के आधार पर ही होता है।राजपाल ने आगे कहा कि जो तस्वीर बाहर दिखाई जा रही है, हकीकत उससे काफी अलग है। उन्होंने दोबारा अदालत का धन्यवाद करते हुए कहा कि न्यायालय ने उनकी बात को समझा और निष्पक्ष तरीके से सुना।

फिल्म की असफलता के बाद बढ़ा विवाद

साल 2012 में रिलीज हुई ‘अता पता लापता’ बॉक्स ऑफिस पर सफल नहीं हो सकी थी। मल्टीस्टारर होने के बावजूद फिल्म दर्शकों को आकर्षित नहीं कर पाई। बताया जाता है कि फिल्म का बजट काफी अधिक था, लेकिन कमाई उम्मीदों के मुताबिक नहीं हुई।फिल्म की व्यावसायिक असफलता के बाद वित्तीय लेन-देन को लेकर विवाद खड़ा हुआ, जो आगे चलकर कानूनी लड़ाई में बदल गया। इसी मामले से जुड़ा चेक बाउंस विवाद अब राजपाल यादव के लिए कानूनी मुश्किलों का कारण बना हुआ है।

Rajpal Yadav: हंसी नहीं छीन सकता कोई

वीडियो में राजपाल यादव भावुक अंदाज में यह भी कहते नजर आते हैं कि पिछले कुछ वर्षों में उन्हें कई तरह के नुकसान झेलने पड़े, लेकिन वे अपनी पहचान और अपनी कला को नहीं खो सकते। उनके शब्दों में, इंसान से बहुत कुछ छीना जा सकता है, मगर उसके भीतर की हंसी और जज्बा नहीं।फिलहाल यह मामला अदालत में विचाराधीन है। वहीं सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा यह वीडियो एक बार फिर राजपाल यादव के पक्ष और उनके दावों को चर्चा के केंद्र में ले आया है।

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