Deepu Chandra Das: बांग्लादेश में भीड़ हिंसा का शिकार हुए फैक्ट्री वर्कर दीपू चंद्र दास की हत्या की गूंज अभी भी पूरी दुनिया में सुनाई दे रही है। सरकार ने उनके परिवार के लिए 50 लाख टका मुआवजे का ऐलान किया, लेकिन दीपू के परिवार ने इसे लेने से साफ इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि पैसे से उनके बेटे की जान की भरपाई नहीं हो सकती, और उनका एकमात्र मकसद है कि हत्यारों को सजा मिले।
परिवार का दर्द: पैसा नहीं, न्याय चाहिए
दीपू के पिता रबी चंद्र दास ने कहा सारी दुनिया का पैसा भी मेरे बेटे की जान का नुकसान नहीं भर सकता। हमें चाहिए कि उसके हत्यारों को कड़ी सजा मिले। ऐसा ट्रायल हो कि यह देश के कानून में मिसाल बन सके। रबी चंद्र ने आगे बताया कि दीपू परिवार का एकमात्र कमाने वाला सदस्य था और इस बेरहमी से हुई हत्या ने उन्हें पूरी तरह से हिला दिया है।
Deepu Chandra Das: सरकार का मुआवजा और सहायता योजना
बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के नेतृत्व में मोहम्मद यूनुस के निर्देश पर दीपू के परिवार के लिए आर्थिक सहायता की योजना बनाई गई थी। इस योजना के तहत:
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दीपू के पिता और पत्नी को 10-10 लाख टका प्रदान किया जाएगा।
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दीपू के बच्चे के नाम पर 5 लाख टके की फिक्स्ड डिपॉजिट रसीद खुली जाएगी।
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सरकार ने दीपू के परिवार के लिए 25 लाख टके की हाउसिंग सहायता और घर बनाने का आदेश दिया है।
सरकारी अधिकारियों ने कहा कि नकद मदद सीधे देने के बजाय इस तरह की योजना बनाई गई है ताकि परिवार का भविष्य सुरक्षित रह सके।
Deepu Chandra Das: भीड़ हिंसा की दर्दनाक घटना
दीपू की हत्या 18 दिसंबर, 2025 को मैमनसिंह जिले के भालुका में हुई थी। भीड़ ने दीपू पर इस्लाम का अपमान करने का आरोप लगाते हुए उसे पीट-पीटकर मार डाला और शव को आग लगा दी। इस घटना ने बांग्लादेश और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर धार्मिक अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।
गिरफ्तारी और जांच
मैमनसिंह के एडिशनल पुलिस सुपरिटेंडेंट मोहम्मद अब्दुल्ला अल मामून ने बताया कि दीपू की हत्या के मामले में अब तक 22 संदिग्धों को गिरफ्तार किया जा चुका है। दीपू के छोटे भाई अपू दास ने 19 दिसंबर को मामले की रिपोर्ट दर्ज कराई थी और पुलिस उस आधार पर कार्रवाई कर रही है।दीपू के परिवार की प्रतिक्रिया ने यह साफ कर दिया है कि उनके लिए किसी भी मुआवजे की कीमत उनकी जिंदगी की कीमत के बराबर नहीं है, और उनका एकमात्र उद्देश्य है कि न्याय हो और हत्यारों को सजा मिले।
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