India-France Rafale: फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की भारत यात्रा से पहले भारत-फ्रांस के बीच 114 राफेल लड़ाकू विमानों की मेगा डील को रक्षा मंत्रालय से मंजूरी मिल गई है। करीब 3.25 लाख करोड़ रुपये की इस डील को डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल (DAC) ने हरी झंडी दी है। यह अब तक की सबसे बड़ी रक्षा खरीद परियोजनाओं में से एक मानी जा रही है।
114 राफेल से बनेंगी 5-6 स्क्वाड्रन
इस सौदे के तहत भारतीय वायुसेना के लिए 114 राफेल लड़ाकू विमान ‘मेक इन इंडिया’ के तहत भारत में बनाए जाएंगे। सूत्रों के अनुसार, इनमें से लगभग 16 विमान सीधे फ्रांस से खरीदे जा सकते हैं, जबकि बाकी का निर्माण भारत में किया जाएगा। 114 विमानों से वायुसेना की 5 से 6 नई स्क्वाड्रन खड़ी की जा सकेंगी। एक स्क्वाड्रन में सामान्यतः 18-20 लड़ाकू विमान शामिल होते हैं। अब यह प्रस्ताव वित्त मंत्रालय और प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) के पास अंतिम मंजूरी के लिए जाएगा।
India-France Rafale: जीटूजी मॉडल पर होगी डील
पिछली राफेल डील की तरह यह सौदा भी गवर्नमेंट टू गवर्नमेंट (G2G) मॉडल पर होगा। करार के बाद फ्रांसीसी कंपनी दासो एविएशन भारत में किसी भारतीय साझेदार के साथ मैन्युफैक्चरिंग प्लांट स्थापित करेगी। बताया जा रहा है कि भारत में बनने वाले राफेल में करीब 60 प्रतिशत स्वदेशी हथियार और उपकरण लगाए जाएंगे।
पहले भी हो चुके हैं बड़े राफेल सौदे
2016 में भारत ने 36 राफेल विमान सीधे फ्रांस से करीब 59 हजार करोड़ रुपये में खरीदे थे। 2025 में नौसेना के लिए 26 राफेल (M) मरीन वर्जन विमान करीब 63 हजार करोड़ रुपये में खरीदे गए, जिन्हें आईएनएस विक्रांत पर तैनात किया जाएगा। नई 114 विमान वाली डील को वायुसेना की घटती स्क्वाड्रन संख्या को ध्यान में रखते हुए आगे बढ़ाया गया है।
India-France Rafale: ऑपरेशनल प्रदर्शन से बढ़ा भरोसा
भारतीय वायुसेना के मौजूदा 36 राफेल विमान मिटयोर, मीका और स्कैल्प मिसाइलों से लैस हैं। हाल के अभियानों में इनके प्रदर्शन को लेकर वायुसेना नेतृत्व ने संतोष जताया है। एयर मार्शल नागेश कपूर ने हाल ही में राफेल को वायुसेना की ताकत बढ़ाने वाला अहम प्लेटफॉर्म बताया था। नई डील के बाद पुराना एमआरएफए (MRFA) प्रोजेक्ट ठंडे बस्ते में जा सकता है, जिसमें 114 मीडियम वेट फाइटर जेट के लिए वैश्विक टेंडर की योजना थी।
रणनीतिक दृष्टि से बड़ा कदम
114 राफेल की यह डील भारत की वायु शक्ति को नई मजबूती देगी और ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल को भी बढ़ावा देगी। मैक्रों के भारत दौरे से पहले लिया गया यह फैसला दोनों देशों के रणनीतिक संबंधों को और मजबूत करने वाला माना जा रहा है।
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