UP News: उत्तर प्रदेश के संभल जिले की चंदौसी तहसील क्षेत्र के गांव नरौली में प्रशासन ने ग्राम समाज की भूमि पर अवैध रूप से निर्मित एक मदरसे को बुलडोजर चलाकर ध्वस्त कर दिया। यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश सरकार की अवैध अतिक्रमण और भू-माफियाओं के खिलाफ चल रही मुहिम के तहत की गई है।
शिकायत के बाद प्रकाश में आया मामला
प्रशासन के अनुसार, ग्राम समाज की गाटा संख्या 1635 और 1636 की कुल 225 वर्ग मीटर भूमि पर लगभग छह वर्ष पूर्व “मदरसा बंजारी कुआं” के नाम से एक मदरसा संचालित किया जा रहा था। भूमि सरकारी अभिलेखों में ग्राम समाज की दर्ज है और इस पर किसी प्रकार की वैध अनुमति या लीज उपलब्ध नहीं थी। ये पूरा मामला स्थानीय शिकायत के बाद प्रकाश में आया। 8 सितंबर 2023 को क्षेत्रीय लेखपाल ने मौके पर पहुंचकर भूमि की पैमाइश की और अपनी रिपोर्ट में अवैध कब्जे की पुष्टि की। रिपोर्ट के आधार पर प्रशासन ने कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की।
जून 2024 में ध्वस्तीकरण के आदेश जारी किए गए। हालांकि मदरसा कमेटी की ओर से एडीएम कोर्ट में अपील दायर की गई, लेकिन न्यायालय ने अपील खारिज कर दी। इसके बाद प्रशासन ने उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता की धारा-67 के तहत अवैध कब्जा हटाने की कार्रवाई को अंतिम रूप दिया।

UP News: भारी पुलिस बल की मौजूदगी में कार्रवाई
गुरुवार को एसडीएम आशुतोष तिवारी के नेतृत्व में दो नायब तहसीलदार, लेखपालों की टीम और कई थानों का पुलिस बल मौके पर पहुंचा। सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए दो बुलडोजर तैनात किए गए। प्रशासन ने पहले मदरसे को खाली कराया, फिर अवैध निर्माण को जमींदोज कर दिया। अधिकारियों ने बताया कि मदरसे में पढ़ रहे बच्चों को गांव के ही निजी भूमि पर संचालित दूसरे मदरसे में स्थानांतरित कर दिया गया है ताकि उनकी पढ़ाई प्रभावित न हो। इस कार्रवाई को लेकर एसडीएम आशुतोष तिवारी ने बताया कि जिन दो गाटा संख्याओं पर मदरसा बना था, वहां अन्य कई मकान भी अवैध रूप से निर्मित पाए गए हैं। उन पर भी नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है। प्रशासन का कहना है कि ग्राम समाज की भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराकर सार्वजनिक उपयोग के लिए सुरक्षित किया जाएगा।
योगी सरकार की नीति के अनुरूप सख्त रुख
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने अवैध कब्जों और भू-माफियाओं के खिलाफ अभियान चला रखा है। सरकार का दावा है कि अब तक हजारों हेक्टेयर सरकारी और ग्राम समाज की भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया जा चुका है। राज्य सरकार बार-बार यह स्पष्ट कर चुकी है कि चाहे धार्मिक स्थल हो या निजी निर्माण—यदि वह सरकारी भूमि पर अवैध रूप से बना है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। संभल में की गई यह कार्रवाई भी उसी नीति के तहत की गई प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा बताई जा रही है। स्थानीय प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे सरकारी भूमि पर किसी भी प्रकार का अवैध निर्माण न करें और विवाद की स्थिति में कानूनी प्रक्रिया का पालन करें।






