Lakhimpur Kheri: उत्तर प्रदेश के जनपद लखीमपुर खीरी की मोहम्मदी तहसील इन दिनों दहशत के साये में जी रही है। क्षेत्र के अखैराजपुर गांव में सक्रिय तेंदुए ने एक बार फिर खूनी खेल खेलते हुए एक और बेगुनाह जानवर को अपना निवाला बना लिया है। तेंदुए की लगातार बढ़ती चहलकदमी और हमलों ने ग्रामीणों की रातों की नींद और दिन का चैन छीन लिया है। विडंबना देखिए कि एक तरफ तेंदुआ इलाके में काल बनकर घूम रहा है, तो दूसरी तरफ वन विभाग की उदासीनता क्षेत्र के लिए सबसे बड़ी मुसीबत साबित हो रही है।
बीती रात फिर हुआ खूनी हमला
जानकारी के अनुसार, मोहम्मदी तहसील क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम अखैराजपुर में बीती रात तेंदुए ने रिहायशी इलाके के करीब धावा बोला। यहाँ तेंदुए ने एक बछड़े पर घातक हमला कर उसे मौत के घाट उतार दिया और अपना निवाला बना लिया। सुबह जब ग्रामीणों ने बछड़े का क्षत-विक्षत शव देखा, तो पूरे गांव में कोहराम मच गया। यह इस क्षेत्र में तेंदुए का पहला हमला नहीं है; इससे पूर्व भी तेंदुआ इसी इलाके में दो अन्य मवेशियों को अपना शिकार बना चुका है।
अखैराजपुर और आसपास के गांवों में अब लोग अपने ही खेतों पर जाने से कतरा रहे हैं। बच्चों को स्कूल भेजने और शाम ढलते ही घरों से बाहर निकलने में ग्रामीणों की रूह कांप रही है। ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि तेंदुआ आए दिन गांव की सरहद पर देखा जा रहा है और उसकी दहाड़ सुनाई देती है, लेकिन बार-बार सूचना देने के बावजूद वन विभाग की टीम केवल मौका मुआयना और खानापूर्ति करने तक सीमित है।
Lakhimpur Kheri: वन विभाग की कार्यशैली पर उठे गंभीर सवाल
क्षेत्र में तेंदुए की सक्रियता और आक्रामकता लगातार जारी है, लेकिन वन विभाग अभी तक पिंजरा लगाने या तेंदुए को पकड़ने के लिए कोई ठोस योजना नहीं बना पाया है। ग्रामीणों का कहना है कि विभाग की यह ‘उदासीनता’ किसी बड़ी मानवीय त्रासदी को न्योता दे रही है। लोगों में इस बात को लेकर गहरा गुस्सा है कि आखिर विभाग किसी इंसान की जान जाने का इंतजार क्यों कर रहा है? अब तक तीन जानवरों को निवाला बना चुका यह तेंदुआ अब रिहायशी इलाकों के बेहद करीब पहुँच चुका है। अखैराजपुर के खेतों में गन्ने की ऊँची फसल होने के कारण तेंदुए को छिपने का सुरक्षित स्थान मिल रहा है, जो किसानों के लिए ‘मौत का जाल’ साबित हो रहा है। स्थानीय ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द कॉम्बिंग ऑपरेशन चलाकर तेंदुए को पकड़ा जाए और उसे चिड़ियाघर या घने जंगल में शिफ्ट किया जाए, वरना ग्रामीण उग्र प्रदर्शन के लिए मजबूर होंगे।
Report By: संजय कुमार राठौर
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