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“तिहाड़ में राजपाल यादव: चेक बाउंस केस में आम कैदी जैसी दिनचर्या कर रहे पालन”

Rajpal Yadav Tihar: बड़े पर्दे पर दर्शकों को हंसी से लोटपोट करने वाले अभिनेता राजपाल यादव इन दिनों खुद एक गंभीर दौर से गुजर रहे हैं। 9 करोड़ रुपये के पुराने चेक बाउंस मामले में गिरफ्तारी के बाद वे फिलहाल दिल्ली की तिहाड़ जेल में न्यायिक हिरासत में हैं। उनकी जमानत पर सुनवाई जारी है, लेकिन तब तक उन्हें जेल के नियमों के तहत ही रहना पड़ रहा है।

चेक बाउंस केस में जेल

राजपाल यादव को पुराने चेक बाउंस मामले में 12 फरवरी को कोर्ट से राहत नहीं मिल सकी। अदालत ने उनकी जमानत याचिका पर अगली सुनवाई 16 फरवरी को तय की है। कानूनी प्रक्रिया पूरी होने तक उन्हें न्यायिक हिरासत में रहना होगा और जेल प्रशासन के नियमों का पालन करना अनिवार्य है।

Rajpal Yadav Tihar: जेल के भीतर कैसी है दिनचर्या?

जेल प्रशासन से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, शुरुआती समय में राजपाल यादव काफी शांत नजर आए, लेकिन धीरे-धीरे उनका वही जाना-पहचाना अंदाज सामने आने लगा है। बताया जा रहा है कि वे बैरक में साथी कैदियों से बातचीत करते हैं और कभी-कभी अपने मशहूर डायलॉग और फिल्मों से जुड़े मजेदार किस्से भी साझा करते हैं।

हालांकि, उन्हें किसी तरह की विशेष सुविधा नहीं दी गई है। वे आम कैदी की तरह बैरक में रह रहे हैं। सुबह तय समय पर बैरक खुलती है, इसके बाद फ्रेश होने, चाय-नाश्ते और फिर दिनभर जेल मैनुअल के अनुसार गतिविधियों का पालन करना होता है। शाम को निर्धारित समय पर भोजन दिया जाता है।

क्या राजपाल यादव से भी कराया जाता है काम?

तिहाड़ जेल के नियमों के अनुसार, कैदियों से उनकी स्थिति और जेल प्रशासन के निर्देशों के आधार पर काम कराया जा सकता है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, राजपाल यादव को कोई विशेष श्रम कार्य नहीं सौंपा गया है। वे सामान्य कैदियों की तरह ही जेल की दिनचर्या और अनुशासन का पालन कर रहे हैं।

जेल मैनुअल के तहत साफ-सफाई, हाजिरी और निर्धारित गतिविधियों में शामिल होना सभी कैदियों के लिए जरूरी होता है और राजपाल यादव भी इन्हीं नियमों के तहत रह रहे हैं।

Rajpal Yadav Tihar: कोई खास सुविधा नहीं ली

सूत्रों का कहना है कि अभिनेता ने जेल के भीतर किसी तरह की विशेष सुविधा की मांग नहीं की है। उन्हें वही भोजन दिया जा रहा है जो जेल के तय मेन्यू में शामिल होता है, जिसमें दाल, सब्जी, रोटी और चावल शामिल हैं। वे रात करीब 10 बजे सो जाते हैं और सुबह जल्दी उठते हैं।

कई कैदी उन्हें देखने और उनसे बातचीत करने की कोशिश करते हैं। बताया जा रहा है कि वे जीवन के उतार-चढ़ाव को लेकर भी चर्चा करते हैं और कहते हैं कि कठिन समय में ही असली रिश्तों की पहचान होती है।

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