Bangladesh: बांग्लादेश के 13वें संसदीय चुनाव में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) की जीत के बाद भारत की प्रतिक्रिया और भविष्य के संबंधों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। भारत की पूर्व उच्चायुक्त वीणा सिकरी ने कहा कि भारत हमेशा स्वतंत्र, निष्पक्ष और सबको साथ लेकर चलने वाली लोकतांत्रिक प्रक्रिया के पक्ष में रहा है। उन्होंने कहा कि जब तक चुनाव समावेशी नहीं होंगे, वे पूरी तरह लोकतांत्रिक और भरोसेमंद नहीं माने जा सकते।
चुनाव प्रक्रिया और अंतरिम सरकार पर सवाल
सिकरी ने कहा कि चुनाव अंतरिम यूनुस सरकार के तहत कराए गए, जो संवैधानिक रूप से निर्वाचित सरकार नहीं थी। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले 18 महीनों में धार्मिक अल्पसंख्यकों और महिलाओं की स्थिति चिंताजनक रही। उनके अनुसार, इस दौरान व्यापक असुरक्षा और असंतोष का माहौल बना, जिसका असर चुनावी प्रक्रिया पर भी पड़ा।
Bangladesh: जमात-ए-इस्लामी की भूमिका पर टिप्पणी
पूर्व उच्चायुक्त ने दावा किया कि जमात-ए-इस्लामी पर्दे के पीछे प्रभावशाली भूमिका में रही और संस्थागत बदलाव किए गए। हालांकि, उन्होंने बीएनपी की जीत को कट्टर इस्लामवाद के खिलाफ जनमत भी बताया। उन्होंने कहा कि चुनाव में कमियों के बावजूद इसे लोकतांत्रिक ताकतों के समर्थन के रूप में देखा जा सकता है।
भारत-बांग्लादेश संबंधों पर आगे की राह
सिकरी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा बीएनपी प्रमुख तारिक रहमान को बधाई देना सकारात्मक संकेत है। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के कार्यकाल में मजबूत द्विपक्षीय संबंधों का उल्लेख करते हुए उम्मीद जताई कि नई सरकार भारत के साथ सहयोग को प्राथमिकता देगी, जिससे बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
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