Vande Mataram: ‘वंदे मातरम’ को लेकर केंद्र सरकार की नई गाइडलाइंस सामने आने के बाद देशभर में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। अलग-अलग दलों के नेताओं ने इसे लेकर अपनी-अपनी प्रतिक्रिया दी है। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने तीखा बयान देते हुए कहा कि भारत में रहने वालों के लिए ‘वंदे मातरम’ गाना अनिवार्य होना चाहिए।
केशव मौर्य का सख्त बयान
केशव प्रसाद मौर्य ने कहा, “कोई भी ‘वंदे मातरम’ का विरोध नहीं कर पाएगा। भारत में रहना है तो ‘वंदे मातरम’ गाना होगा। जो इसका विरोध करेगा, उसके असली रंग सामने आ जाएंगे।”उनके इस बयान के बाद सियासी हलकों में बहस और तेज हो गई।
Vande Mataram: कांग्रेस सांसद इमरान मसूद का विरोध
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने इस बयान का विरोध करते हुए कहा कि आस्था और इबादत का तरीका किसी पर थोपा नहीं जा सकता। उन्होंने कहा, “आप ‘वंदे मातरम’ पढ़ेंगे तो हम खड़े होंगे, लेकिन आप मुझसे मेरी इबादत का तरीका बदलने की उम्मीद कैसे कर सकते हैं? संविधान मुझे इसकी आज़ादी देता है।”
संतुलित सुर में शिवसेना और अन्य नेता
मुंबई के उपमहापौर संजय घाडी ने कहा कि अगर केंद्र या राज्य सरकार कोई कानून बनाती है और उसे लागू करती है तो उसका पालन होना चाहिए, लेकिन यह किसी धर्म के विरोध में नहीं होना चाहिए। उन्होंने सभी धर्मों के सम्मान की बात कही। शिवसेना प्रवक्ता शाइना एनसी ने कहा कि ‘वंदे मातरम’ राष्ट्रीय गौरव का विषय है और भारत में रहने वालों को इसे सीखना चाहिए। उनके मुताबिक, यह विवाद का विषय नहीं होना चाहिए।
Vande Mataram: भाजपा नेताओं का तीखा रुख
भाजपा सांसद मयंकभाई नायक ने कहा कि इस वर्ष ‘वंदे मातरम’ की 150वीं वर्षगांठ मनाई जा रही है और इसके पूरे पाठ पर आपत्ति दुर्भाग्यपूर्ण है।
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