Bangladesh: बांग्लादेश चुनाव में राजनीतिक बदलाव के बाद नये सिरे से नई दिल्ली के साथ संधि करना चाहता है। इस बात को तारिक रहमान ने दो दिन पूर्व कहा था कि संसदीय चुनाव में बीएनपी को दो तिहाई बहुमत मिला है, इसलिए भारत को यह स्वीकारते हुए बांग्लादेश के साथ रिश्ते तय करने चाहिए। संबंध बराबरी के होने चाहिए।
ढ़ाका अब शेख हसीना और उसकी आवामी लीग पार्टी के बजाय तारिक रहमान के साथ नये सिरे से भारत के साथ संबंधों की पेशकस कर रहा है। तारिक रहमना जो प्रधानमंत्री हैं, वह चाहते है कि भारत इस वास्तविकता को समझे कि अब शेख हसीना और उनकी पार्टी बांग्लादेश की राजनीति और सरकार का केंद्रबिंदु नहीं है। इस सच्चाई को भारत स्वीकार करे, तब ही नये रिश्तों की भारत के साथ शुरुआत हो सकती हैं। क्योंकि तारिक रहमान की पार्टी को इस आम चुनाव में दो तिहाई बहुमत प्राप्त हुआ है। 297 सीटों में चुनाव हुए थे; उनमें से 209 सीटों पर तारिक रहमान की पार्टी ने जीत हासिल की है। मंगलबार 4 बजे बीएनपी पार्टी के नेता पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान को प्रधानमंत्री की शपथ राष्ट्रपति मोहमद शाहबुद्दीन दिलाएंगे, साथ ही कैबनेट भी शपथ लेगी।
भारत की ओर से लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला प्रतिनिधित्व करेंगे। तारिक रहमान ने पूरे शार्क देशों के राष्ट्राध्यक्षों को शपथ ग्रहण समारोह में आमंत्रित किया है। तारिक रहमान के सलाहकार हुमायू कबीर कहते हैं कि दोनो देश आपसी लाभों को देखते हुए कार्य करेंगे। कबीर कहते हैं कि प्रधानमंत्री मोदी ने रहमान को भारत आने का निमंत्रण दिया है। पर यह अभी नहीे हो पायेगा। पहले तो देश के भीतर हो रखी उथल-पुथल को सुलझाने का वक्त है। स्थितियां सामान्य हाने पर ही भारत दौरा हो सकेगा। पहले तो देश की समृद्धि और आर्थिक सुरक्षा की जिम्मेदारियों को संभालना पहला कार्य है। जब देश में परिस्थितियां ठीक होंगी, तब ही अन्य कार्य हो पायेंगे। विदेश नीति की परिस्थितियां क्षेत्रीय शक्तियों में संतुलन कर ही संभव हो सकेगी। एक ही देश के प्रति झुकाव से विकास में बाधा आ सकती है। हमें जनता द्वारा मिले मैंडेट को देखते हुए अपनी शक्तियों को रचनात्मक कार्यों में ही झोंकना होगा।
अल्पसंख्यकों की सुरक्षा विशेषकर हिुंदुओं पर हो रहे सांप्रदायिक दंगों से अत्याचार को कबीर ने खारिज किया। यहां तक कि अगस्त में पांच दिन जब बगैर सरकार के बांग्लादेश रहा, जो स्थिति असंवैधानिक अवस्था की थी, उस समय भी अल्पसंख्यकों को किसी ने नहीं मारा। जिस तरह से उस दौरान अल्पसंख्यकों पर हो रहे हमलों का जिक्र बढ़ाचढ़ाकर किया गया, जबकि ऐसी परिस्थितियां नहीं थीं। यहां तक कि अंतरिम सरकार के समय भी। अंतरिम सरकार ने सही ढ़ंग से स्थितियों को संभाला। कहीं भी सांप्रदायिक हमले नहीं हुए।
कबीर ने आग्रह किया कि क्षेत्रीय अख्ंाडता को मजबूत करने के लिए आपसी संबंध मजबूत होने चाहिए। इससे आंतकवादियों को समाप्त करने पर बल मिलेगा। इसमें इंटैलिजेंस का आपसी सहयोग भी होना चाहिए। सूचनाओं का आदान-प्रदान होना भी आवश्यक है। इससे एक दूसरे में आपसी विश्वास को मजबूत करने में बल मिलेगा। बीर ने इस बात को दोहराया कि बीएनपी सरकार की प्राथमिकता में शांति, समृद्धि, आर्थिक मजबूती और सुरक्षा सहयोग सीमा क्षेत्र में होना चाहिए।
लेखक: भगवती प्रसाद डोभाल
ये भी पढ़े… ‘अन्नदाता, कानून-व्यवस्था और विकास’ पर CM योगी का बड़ा वार, विधान परिषद में सपा को घेरा






