Bihar News: कहते हैं कि राजनीति में तस्वीरें बोलती हैं, लेकिन कांटी राजद कार्यालय में आयोजित ‘जननायक कर्पूरी पखवाड़ा जयंती’ की तस्वीरों ने तो बाकायदा चिल्लाना शुरू कर दिया है। कहने को तो यह आयोजन उस महान विभूति की याद में था जिन्होंने सादगी का पाठ पढ़ाया, लेकिन कार्यालय के भीतर की तपिश बता रही थी कि मामला ‘श्रद्धांजलि’ से ज्यादा ‘सियासी खुन्नस’ का है। कार्यक्रम जननायक कर्पूरी ठाकुर की सादगी को याद करने के लिए था, पर चर्चा का केंद्र सादगी नहीं, बल्कि हैदर आजाद की मौजूदगी और उससे पैदा हुई कुछ खास कार्यकर्ताओं की ‘बेचैनी’ रही। कांटी के सियासी गलियारों में यह सवाल गूंज रहा है- आखिर हैदर आजाद के नाम से कुछ लोगों के माथे पर पसीना क्यों आ रहा है? क्या यह जननायक के प्रति प्रेम है या पूर्व विधायक इसराइल मंसूरी और हैदर आजाद के बीच ‘एक म्यान में दो तलवारें’ रहने की छटपटाहट? कहने को तो यह राजद का अनुशासित कार्यक्रम था, लेकिन हवा में तैरती तल्खी बता रही थी कि मामला ‘विरासत बनाम सियासत’ का है। एक तरफ पूर्व विधायक इसराइल मंसूरी हैं, जो कांटी की जमीन पर अपनी पकड़ को ‘अंगद का पैर’ मानते हैं। दूसरी तरफ हैदर आजाद हैं, जिनकी सक्रियता 25 वर्षों से क्षेत्र में बनी हुई है।

कांटी की फिजाओं में यह सवाल तैर रहा है कि क्या कर्पूरी पखवाड़ा महज एक जयंती समारोह था या फिर पूर्व विधायक इसराइल मंसूरी और हैदर आजाद के बीच ‘वर्चस्व की नूराकुश्ती’ का नया अध्याय? चुकी इस कार्यक्रम में जो कुछ भी हुआ उसमें शुरू से अंत तक पूर्व विधायक मौजूद रहे, बात 2024 की लोकसभा चुनाव की चली तो पूर्व विधायक मंसूरी भी झल्ला गए। ऐसे में सवाल उठता है कि पूर्व विधायक पार्टी में इतने ही जमीनी पकड़ रखते है तो उनके ही चुनाव के समय मरवन राजद के कद्दावर नेताओं की फौज उनका विरोध क्यों किया। क्या विरोध करने वाले वे लोग पार्टी के प्रति समर्पित नहीं थे? चुनाव के समय आखिर उनलोगों को पूर्व विधायक ने मनाने की कोशिश क्यों नहीं की। दूसरी ओर हैदर आजाद जिनके ऊपर चंद कार्यकर्ताओं का या अप्रत्यक्ष रूप से पूर्व विधायक का आरोप है कि उन्होंने चुनाव में भीतरघात किया इसलिए हार हुई। तो क्या हैदर आजाद इतने मजबूत है कि चुनाव हराने और जिताने का मद्दा रखते है।
बेशक हैदर आजाद के ऊपर कांटी चुनाव के संदर्भ में भीतरघात का आरोप लगा लेकिन पार्टी आलाकमान के नजर में हैदर आजाद आरोपों से मुक्त रहे, हालांकि वर्ष 2024 में उन्हें पार्टी से निष्कासित किया गया था लेकिन 1 महीने के भीतर पुनः उन्हें घर वापसी क्यों कराया गया? क्या पूर्व विधायक मंसूरी पार्टी में एकाधिकार राज चाहते है? चुकी ऐसा ही नजारा 24 जनवरी को जिला राजद के कर्पूरी जयंती कार्यक्रम में भी दिखा था, कार्यकर्ताओं के हंगामे का आरोप राजद के किसान सेल के जिलाध्यक्ष मंगल यादव ने पूर्व विधायक पर लगाया था। उन्होंने कहा था कि पूर्व विधायक के इशारों पर चंद कार्यकर्ताओं द्वारा हंगामा कराया गया है।

अजीब विडंबना है कि जिस जननायक ने अपना पूरा जीवन पिछड़ों और वंचितों को जोड़ने में लगा दिया, उनकी जयंती पर पार्टी के नेता खुद को एक-दूसरे से श्रेष्ठ साबित करने में लगे हैं। कांटी राजद कार्यालय की ये तस्वीरें गवाह हैं कि यहाँ ‘कर्पूरी विचार’ को आत्मसात करने के बजाए पार्टी में पछाड़ने का खेल चल रहा है। दो चार साल से पार्टी में काम कर रहे वैसे कार्यकर्ता भी उन नेताओं पर सवाल उठा रहे है जिन्होंने पूरी जिंदगी राजद को समर्पित कर दिया। अगर यही आलम रहा, तो ‘वर्चस्व की यह लड़ाई’ कांटी में राजद के लिए आत्मघाती साबित हो सकती है। अब देखना यह है कि पार्टी आलाकमान इस ‘बेचैनी’ की दवा करता है या कांटी की राजनीति में राजद के भीतर आपसी खींचतान यूंही बढ़ता रहता है।
Report BY: Santosh Tiwari






