India-France Hammer Missile Deal: भारत और फ्रांस के बीच राफेल डील की चर्चा तो जोरों पर है, लेकिन इस डील का सबसे घातक पहलू हैमर मिसाइल है। ऑपरेशन सिंदूर में ब्रह्मास्त्र साबित हो चुकी यह फ्रांसीसी मिसाइल अब मेक इन इंडिया के तहत भारत में ही बनेगी। इस फैसले को भारत की सैन्य ताकत और आत्मनिर्भर रक्षा नीति के लिए बड़ा गेमचेंजर माना जा रहा है।
फ्रांस ‘हैमर’ डील क्या है?
17 फरवरी 2026 को भारत दौरे पर आए फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच हुई उच्चस्तरीय बातचीत में इस अहम रक्षा समझौते पर मुहर लगी। फ्रांस की कंपनी सफ़रान और भारत की भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल) दोनों के बीच 50:50 जॉइंट वेंचर के तहत हैमर मिसाइल की गाइडेंस किट और प्रमुख कंपोनेंट्स भारत में बनाए जाएंगे। यह डील राफेल विमानों की प्रस्तावित 114 फाइटर जेट्स की खरीद से भी जुड़ी है।
India-France Hammer Missile Deal: क्या है हैमर मिसाइल?
हैमर का पूरा नाम अत्यधिक चुस्त मॉड्यूलर गोला-बारूद विस्तारित रेंज (हैमर) है। यह एक हाई-प्रिसिजन एयर-टू-ग्राउंड स्मार्ट हथियार है, जिसे खासतौर पर Rafale से दागा जाता है।
हैमर की खासियतें:
70 किलोमीटर तक मारक क्षमता, हर मौसम, दिन-रात हमला करने में सक्षम, GPS, लेजर और इंफ्रारेड गाइडेंस, 250 kg से 1000 kg तक के वैरिएंटऔर पहाड़ी इलाकों और अंडरग्राउंड बंकरों को तबाह करने में माहिर है।
ऑपरेशन सिंदूर में कैसे बनी ‘ब्रह्मास्त्र’?
मई 2025 में हुए ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय वायुसेना ने हैमर मिसाइल से सटीक हमले कर पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचाया था। डिफेंस एक्सपर्ट्स के मुताबिक, हैमर की सटीकता इतनी जबरदस्त है कि न्यूनतम कोलेटरल डैमेज के साथ टारगेट खत्म हो जाता है।
India-France Hammer Missile Deal: पाकिस्तान के लिए क्यों है यह डील बुरी खबर?
एलओसी पर भारत की स्ट्राइक कैपेबिलिटी कई गुना बढ़ेगी, राफेल + हैमर कॉम्बो से आतंकी कैंप और बंकर मिनटों में तबाह और लोकल प्रोडक्शन से भारत को तेज सप्लाई और ऑपरेशनल बढ़त है पाकिस्तानी मीडिया में डील को बताया जा रहा है “भारत की आक्रामक बढ़त” सक्रिय हो सकती है ।
आत्मनिर्भर भारत की ओर बड़ा कदम
यह डील सिर्फ एक हथियार समझौता नहीं है, बल्कि मेक इन इंडिया, रोजगार सृजन और भविष्य में डिफेंस एक्सपोर्ट को बढ़ावा देने की मजबूत नींव है। फ्रांस की एडवांस टेक्नोलॉजी और भारत की मैन्युफैक्चरिंग ताकत मिलकर देश को रक्षा क्षेत्र में नई ऊंचाइयों पर ले जा सकती है।






