ख़बर का असर

Home » राष्ट्रीय » मोहन भागवत के यूजीसी बयान पर सियासी घमासान, तनवीर सादिक बोले– किसी पर विचार थोपना लोकतंत्र के खिलाफ

मोहन भागवत के यूजीसी बयान पर सियासी घमासान, तनवीर सादिक बोले– किसी पर विचार थोपना लोकतंत्र के खिलाफ

Mohan bhagwat

Mohan bhagwat: यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) की गाइडलाइन को लेकर जम्मू-कश्मीर की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है। नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायक तनवीर सादिक ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि देश में किसी भी विचार को लोगों पर थोपना उचित नहीं है और यह लोकतांत्रिक भावना के विपरीत है।

तनवीर सादिक ने कहा कि भारतीय संविधान हर नागरिक को अपने धर्म और विचार रखने की स्वतंत्रता देता है। ऐसे में किसी खास सोच या निर्णय को पूरे समाज पर लागू करने की कोशिश लोकतंत्र की मूल भावना को कमजोर करती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि विविधता ही भारत की ताकत है और इसे बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है।

घुसपैठियों को लेकर टिप्पणी पर भी उठाए सवाल

यूजीसी गाइडलाइन से जुड़े बयान में घुसपैठियों को रोजगार न देने संबंधी टिप्पणी पर भी तनवीर सादिक ने सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि यह तय कौन करेगा कि घुसपैठिया कौन है। यदि किसी पूरे समुदाय को संदेह के घेरे में रखा जाता है, तो यह न केवल गलत बल्कि समाज को बांटने वाला कदम है।

Mohan bhagwat: पीडीपी विधायक की भी प्रतिक्रिया

पीडीपी विधायक आगा सैयद मुंतजिर मेहदी ने भी यूजीसी से जुड़े प्रावधानों पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि कानून का उद्देश्य नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करना होता है, न कि किसी विशेष वर्ग को दंडित करना। उनके अनुसार मौजूदा कदम एक वर्ग को संतुष्ट करने और दूसरे को दंडित करने की मानसिकता से प्रेरित दिखाई देता है।

विपक्ष का संतुलित रुख

वहीं जम्मू-कश्मीर में नेता प्रतिपक्ष सुनील शर्मा ने यूजीसी गाइडलाइन का समर्थन करते हुए कहा कि नियमों का पालन होना चाहिए और इस पर अनावश्यक विवाद खड़ा करने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र को राजनीति से दूर रखा जाना चाहिए और शैक्षणिक संस्थानों में व्यवस्था सर्वोपरि होनी चाहिए।

Mohan bhagwat: मोहन भागवत का क्या था बयान

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने यूजीसी गाइडलाइन से जुड़े सवाल पर कहा था कि कानून सभी को मानना चाहिए और यदि कोई कानून गलत है तो उसे बदलने का संवैधानिक तरीका मौजूद है। उन्होंने यह भी कहा था कि जातियां संघर्ष का कारण नहीं बननी चाहिए और समाज में अपनत्व और समन्वय की भावना मजबूत होनी चाहिए।

भागवत ने लखनऊ के सरस्वती शिशु मंदिर, निराला नगर में आयोजित सामाजिक सद्भाव बैठक के दौरान कहा था कि जो लोग पीछे रह गए हैं, उन्हें आगे बढ़ाने के लिए समाज को झुककर सहयोग करना चाहिए। संघर्ष नहीं, बल्कि सामाजिक समन्वय से ही देश की प्रगति संभव है।

ये भी पढ़ें… मध्यप्रदेश का 4.38 लाख करोड़ का बजट पेश, विकास और युवाओं पर जोर

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Oldest
Newest Most Voted
Inline Feedbacks
View all comments

Share this post:

खबरें और भी हैं...

Live Video

लाइव क्रिकट स्कोर

khabar india YouTube posterKhabar India YouTube

राशिफल