Phulera Duij Festival: भगवान श्री कृष्ण और राधा रानी के प्रेम को समर्पित फुलेरा दूज का पावन उत्सव इस साल 19 फरवरी को मनाया जाएगा। यह त्योहार फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को पड़ता है। विशेष रूप से ब्रज क्षेत्र, जैसे मथुरा और वृंदावन में इसे अत्यधिक महत्व दिया जाता है। इस दिन भगवान कृष्ण को होली की तैयारियों में दिखाया जाता है, जो होली उत्सव की शुरुआत का संकेत है।

फुलेरा दूज का समय और महत्व
फुलेरा दूज बसंत पंचमी और होली के बीच आता है। ब्रज के मंदिरों में इस दिन खास झांकियां सजाई जाती हैं, जिनमें राधा-कृष्ण की होली लीला का दृश्य भक्तों को बहुत भाता है। इसे फुलैरा दूज के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक दृष्टि से इसे दोषों से मुक्ति का दिन माना जाता है।

Phulera Duij Festival: शुभ कार्य और मांगलिक आयोजन
कई मान्यताओं के अनुसार, इस दिन विवाह, सगाई जैसे मांगलिक काम बिना किसी विशेष मुहूर्त के किए जा सकते हैं, क्योंकि इसे अबूझ मुहूर्त माना जाता है। हालांकि सभी ज्योतिषी इस बात पर सहमत नहीं हैं। कुछ पंचांगों में इसे विवाह के लिए अलग सूचीबद्ध नहीं किया गया है।मान्यता है कि इसी दिन श्री कृष्ण ने गोपियों के साथ फूलों की होली खेली थी। इसी दिन से ब्रज की होली उत्सव की शुरुआत मानी जाती है।

दिन और समय विवरण (19 फरवरी, गुरुवार)
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नक्षत्र: पूर्व भाद्रपद, रात 8 बजकर 52 मिनट तक
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चंद्रमा राशि: कुंभ
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सूर्योदय: 6:56 बजे
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सूर्यास्त: 18:14 बजे
राहुकाल और अशुभ काल:
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राहुकाल: 14:00 से 15:25
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यमगंड: 6:56 से 8:21
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गुलिक काल: 9:46 से 11:10

शुभ मुहूर्त:
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अभिजित मुहूर्त: 12:13 से 12:58
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विजय मुहूर्त: 14:28 से 15:13
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अमृत काल: 13:00 से 14:34
Phulera Duij Festival: पर्व की रौनक
फुलेरा दूज रंग, खुशी और भक्ति से भरा होता है। भक्त इस दिन राधा-कृष्ण की पूजा करते हैं और प्रसाद वितरित करते हैं। इस अवसर पर ब्रज क्षेत्र का माहौल पूरी तरह उल्लास और आध्यात्मिक आनंद से भर जाता है।
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