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Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट की फटकार: मुफ्त योजनाओं से आगे बढ़ो, विकास पर दो ध्यान

Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट की फटकार: मुफ्त योजनाओं से आगे बढ़ो, विकास पर दो ध्यान

Supreme Court: देश में चल रही मुफ्त योजनाओं और सब्सिडी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए राज्यों और केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। तमिलनाडु में मुफ्त बिजली योजना से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने कहा कि सरकारों को कल्याणकारी योजनाओं और दीर्घकालिक विकास के बीच संतुलन बनाना होगा, वरना बुनियादी ढांचे और रोजगार सृजन पर असर पड़ सकता है। अदालत ने इस मुद्दे पर केंद्र और राज्य दोनों को नोटिस जारी किया है।

बिजली नियमों पर विवाद से शुरू हुई सुनवाई

मामला तब सामने आया जब तमिलनाडु पावर डिस्ट्रीब्यूशन कॉर्पोरेशन ने केंद्र सरकार के बिजली से जुड़े नियमों को चुनौती दी। कंपनी का कहना था कि नए नियम राज्यों की योजनाओं और प्रशासनिक अधिकारों में हस्तक्षेप करते हैं। सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील की दलीलों को सुनने के बाद अदालत ने दोनों पक्षों से जवाब तलब किया, लेकिन साथ ही मुफ्त बिजली और अन्य व्यापक सब्सिडी योजनाओं पर भी चिंता जताई।

Supreme Court: अदालत ने पूछा किस दिशा में जा रही नीतियां?

सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा कि जिन लोगों को वास्तव में सहायता की जरूरत है, उनके लिए योजनाएं जरूरी हैं, लेकिन सभी को बिना भेदभाव के मुफ्त सुविधाएं देना वित्तीय दबाव बढ़ा सकता है। अदालत ने सवाल उठाया कि अगर राज्यों के पास सीमित संसाधन हैं, तो उन्हें अस्पताल, स्कूल, कॉलेज और बुनियादी ढांचे पर खर्च को प्राथमिकता देनी चाहिए। अदालत ने यह भी कहा कि राजकोषीय घाटे से जूझ रहे राज्यों को नीतियों की समीक्षा कर दीर्घकालिक प्रभावों पर विचार करना चाहिए।

Supreme Court: डायरेक्ट कैश ट्रांसफर और अन्य योजनाओं पर भी चर्चा

सुनवाई के दौरान अदालत ने डायरेक्ट कैश ट्रांसफर और अन्य मुफ्त योजनाओं पर भी चिंता जताई। पीठ का कहना था कि सरकारों की जिम्मेदारी रोजगार के अवसर बढ़ाने और आर्थिक गतिविधियों को मजबूत करने की भी है। यदि संसाधन लगातार मुफ्त योजनाओं पर खर्च होते रहे, तो विकास के लिए जरूरी निवेश प्रभावित हो सकता है।

संतुलित नीति बनाने पर जोर

सुप्रीम कोर्ट ने अपने अवलोकन में यह स्पष्ट किया कि कल्याणकारी योजनाएं जरूरतमंदों तक सीमित और लक्षित होनी चाहिए। साथ ही, सरकारों को ऐसी नीतियां बनानी चाहिए जो आर्थिक मजबूती, रोजगार और बुनियादी ढांचे के विकास को भी समान प्राथमिकता दें। अदालत ने कहा कि इस मुद्दे पर सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आगे की दिशा तय की जाएगी।

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