UP News: उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को भ्रष्टाचार और अव्यवस्था से मुक्त करने के अभियान में योगी सरकार ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। प्रदेश के उपमुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक ने एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक के बाद कड़ा रुख अपनाते हुए निजी अस्पतालों के खिलाफ किए गए एक्शन का ब्यौरा सार्वजनिक किया है। स्वास्थ्य मंत्री की इस कार्रवाई ने पूरे प्रदेश के स्वास्थ्य महकमे और मानकों की धज्जियां उड़ाने वाले अस्पताल संचालकों के बीच हड़कंप मचा दिया है।
500 शिकायतों का हुआ ‘पोस्टमार्टम’
स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक ने बताया कि विभाग को लगातार निजी अस्पतालों के खिलाफ जनता से शिकायतें मिल रही थीं। शिकायतों का अंबार इतना बड़ा था कि इसकी गहन जांच के लिए विशेष टीमों का गठन किया गया था। कुल 500 गंभीर शिकायतों के आधार पर प्रदेश भर में औचक छापेमारी और रिकॉर्ड्स की जांच की गई। मंत्री ने स्पष्ट किया कि शिकायतों में मुख्य रूप से अवैध वसूली, बिना डिग्री वाले डॉक्टरों द्वारा ऑपरेशन, मानकों के विपरीत बिल्डिंग का निर्माण और फायर सेफ्टी जैसे अनिवार्य नियमों की अनदेखी शामिल थी।
UP News: 178 लाइसेंस रद्द, 280 पर मुकदमा
ब्रजेश पाठक ने बताया कि जांच में दोषी पाए गए संस्थानों पर बिना किसी राजनीतिक या सामाजिक दबाव के सीधी कार्रवाई की गई है…
* 178 अस्पतालों के लाइसेंस निरस्त: प्रदेश के विभिन्न जिलों में संचालित 178 निजी अस्पतालों के लाइसेंस को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया गया है। इन अस्पतालों में गंदगी, अप्रशिक्षित स्टाफ और जीवन रक्षक उपकरणों का अभाव पाया गया था।
* 280 अस्पतालों पर FIR: जो अस्पताल मानकों के विपरीत चल रहे थे या जो बिना वैध पंजीकरण के ‘मौत की दुकान’ चला रहे थे, उन पर कानूनी शिकंजा कसा गया है। कुल 280 अस्पतालों के संचालकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है। कई अस्पतालों को मौके पर ही सील कर दिया गया है।
अस्पतालों पर कार्रवाई के साथ-साथ स्वास्थ्य मंत्री ने उन तत्वों को भी आड़े हाथों लिया जो भ्रष्टाचार के नाम पर अपनी जेबें भर रहे हैं। ब्रजेश पाठक ने खुलासा किया कि सरकार को ऐसी सूचनाएं मिली हैं कि कुछ लोग और तथाकथित संगठन निजी अस्पतालों को टारगेट करते हैं और कमियां उजागर करने की धमकी देकर उनसे भारी वसूली करते हैं। स्वास्थ्य मंत्री ने दो टूक शब्दों में कहा कि मरीजों की जान से खिलवाड़ करने वाले अस्पताल हमारे दुश्मन हैं, लेकिन अस्पतालों को डरा-धमकाकर वसूली करने वाले ब्लैकमेलर भी अपराधी हैं। जो लोग निजी अस्पतालों को टारगेट करके वसूली का धंधा चला रहे हैं, उनके खिलाफ सरकार कठोरतम कार्रवाई करेगी। वसूली करने वालों की जगह जेल में है।
योगी सरकार का ‘जीरो टॉलरेंस’
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ‘जीरो टॉलरेंस’ मॉडल को स्वास्थ्य विभाग में कड़ाई से लागू किया जा रहा है। 2026 के इस नए उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को सुलभ और पारदर्शी बनाना सरकार की प्राथमिकता है। ब्रजेश पाठक ने कहा कि निजी अस्पतालों को सेवा भाव से काम करना होगा, यदि वे लूट का अड्डा बनेंगे तो उनका अस्तित्व मिटा दिया जाएगा। निजी अस्पतालों को नए दिशा-निर्देश दिए गए है कि हर अस्पताल को अपने प्रवेश द्वार पर रेट लिस्ट और उपलब्ध सुविधाओं का बोर्ड लगाना अनिवार्य होगा। डॉक्टरों की डिग्री और स्टाफ का वेरिफिकेशन अनिवार्य रूप से स्वास्थ्य विभाग के पोर्टल पर दर्ज होना चाहिए। इमरजेंसी सेवाओं में किसी भी मरीज को भर्ती करने से मना करना भारी पड़ सकता है।
इस दौरान स्वास्थ्य मंत्री ने पिछली सरकारों पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि 2017 से पहले स्वास्थ्य विभाग केवल भ्रष्टाचार का अड्डा हुआ करता था, लेकिन आज उपमुख्यमंत्री स्वयं सड़कों पर उतरकर और अस्पतालों का औचक निरीक्षण कर व्यवस्था सुधार रहे हैं। उन्होंने जनता को भरोसा दिलाया कि किसी भी गरीब के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा। ब्रजेश पाठक द्वारा की गई यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश के चिकित्सा इतिहास में एक मील का पत्थर मानी जा रही है। 178 लाइसेंसों का रद्द होना और 280 एफआईआर इस बात का प्रमाण है कि अब ‘जुगाड़’ या ‘सेटिंग’ से अस्पताल चलाना मुमकिन नहीं होगा। यह उन झोलाछाप और अवैध रूप से फल-फूल रहे नर्सिंग होम के लिए एक अंतिम चेतावनी है जो आम जनता की मेहनत की कमाई और जिंदगी को दांव पर लगाते हैं।
Repory By: संजय कुमार






