Jharkhand: झारखंड हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि केवल संदेह या सामान्य आरोपों के आधार पर तलाक नहीं दिया जा सकता। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि अवैध संबंध जैसे गंभीर आरोपों को साबित करने के लिए ठोस और विश्वसनीय साक्ष्य प्रस्तुत किए जाने चाहिए। यह फैसला एक दंपती के बीच के वैवाहिक विवाद से जुड़ा है, जिसमें पति ने अपनी पत्नी पर अवैध संबंध रखने का आरोप लगाया था।
अवैध संबंध के आरोपों को साबित करने के लिए साक्ष्य जरूरी
इस मामले में पति ने आरोप लगाया था कि उसकी पत्नी ने शादी के कुछ समय बाद किसी अन्य व्यक्ति से अवैध संबंध स्थापित कर लिए थे। 2021 में पत्नी अपने दो बच्चों, आभूषण और नगदी के साथ घर छोड़कर चली गई थी। इस आधार पर पति ने गोड्डा जिला स्थित फैमिली कोर्ट में तलाक की याचिका दायर की थी। हालांकि, अदालत ने आरोपों के समर्थन में पर्याप्त साक्ष्य पेश न होने के कारण याचिका खारिज कर दी थी।
Jharkhand: हाईकोर्ट का निर्णय
पति ने निचली अदालत के फैसले को चुनौती देते हुए झारखंड हाईकोर्ट में अपील दायर की। हाईकोर्ट की खंडपीठ ने निचली अदालत के निर्णय को बरकरार रखा और कहा कि केवल संदेह या सामान्य आरोपों के आधार पर तलाक नहीं दिया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि अवैध संबंध के आरोपों के समर्थन में कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए गए, जैसे कॉल डिटेल रिकॉर्ड या दस्तावेज।
सामान्य विवाद को ‘क्रूरता’ नहीं माना जा सकता
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि वैवाहिक जीवन में सामान्य मतभेद, तकरार या पारिवारिक विवाद को ‘क्रूरता’ के रूप में नहीं माना जा सकता। तलाक जैसे गंभीर मामले में आरोपों का स्पष्ट और प्रमाणिक होना अनिवार्य है, ताकि वैवाहिक संबंधों को समाप्त किया जा सके।






