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संघ की अलग पहचान! शाखाएं हैं व्यक्ति निर्माण की कार्यशाला – भागवत

Mohan Bhagwat: मेरठ में आयोजित संघ शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में प्रमुख जन गोष्ठी को संबोधित करते हुए मोहन भागवत ने कहा कि संघ की तुलना किसी भी संगठन से नहीं की जा सकती, क्योंकि संघ जैसा कोई दूसरा संगठन है ही नहीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि शाखा को देखकर कुछ लोग संघ को पैरा मिलिट्री संगठन मान लेते हैं, जबकि वास्तव में संघ व्यक्ति निर्माण की कार्यशाला है, जहां व्यक्ति के सर्वांगीण विकास पर कार्य होता है।

डॉ. हेडगेवार के विचार और संघ की स्थापना

सरसंघचालक ने बताया कि संघ स्थापना से पहले देश की परिस्थितियों पर गहन मंथन हुआ। डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार का संपर्क बाल गंगाधर तिलक, मदन मोहन मालवीय, सुभाष चंद्र बोस, वीर सावरकर, भगत सिंह और चंद्रशेखर आजाद जैसे राष्ट्रनायकों से था। सभी का साझा चिंतन था कि समाज के बिखराव और कुरीतियों का समाधान समरस, संगठित और अनुशासित समाज से ही संभव है।

Mohan Bhagwat: हिन्दू की अवधारणा और विविधता में एकता

मोहन भागवत ने कहा कि भारत में रहने वाला हर व्यक्ति हिन्दू है, चाहे उसकी पूजा पद्धति या मत अलग हों। हिन्दू का अर्थ जोड़ना और सबके कल्याण की कामना करना है। उन्होंने कहा कि भारत की विविधता उसका स्वभाव है, लेकिन इसके बावजूद देश हमेशा एक राष्ट्र के रूप में एकजुट रहा है। हमारे पूर्वजों ने आध्यात्मिक रूप से समझा कि विविधता दिखावटी है, जबकि एकता ही सत्य है।

संघर्षों के बावजूद संघ का निरंतर कार्य

उन्होंने बताया कि संघ ने अपने सौ वर्षों के सफर में प्रतिबंध, झूठे आरोप, राजनीतिक विरोध और स्वयंसेवकों पर हमले तक झेले। बावजूद इसके स्वयंसेवकों की दृढ़ इच्छाशक्ति के कारण आज संघ समाज जीवन के अनेक क्षेत्रों में सक्रिय भूमिका निभा रहा है। शताब्दी वर्ष में संघ समाज के बीच जाकर अपने कार्यों की जानकारी दे रहा है।

Mohan Bhagwat: शिक्षा, समरसता और सामाजिक जिम्मेदारी

जिज्ञासा समाधान सत्र में शिक्षा, स्वास्थ्य, मूल्य आधारित संस्कार और सामाजिक समरसता पर सवालों के जवाब देते हुए सरसंघचालक ने कहा कि शिक्षा सभी के लिए सुलभ होनी चाहिए। समाज को सहयोग और संस्कार के माध्यम से वंचितों को शिक्षित करना होगा। उन्होंने जातिगत राजनीति पर चिंता जताते हुए कहा कि समाज को स्वयं समरसता अपनानी होगी। साथ ही ओटीटी सामग्री पर विवेकपूर्ण चयन की आवश्यकता पर भी बल दिया।

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