Gainbitcoin crypto scam: हजारों करोड़ रुपये के कथित क्रिप्टोकरेंसी घोटाले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए डार्विन लैब्स प्राइवेट लिमिटेड के सह-संस्थापक और सीटीओ आयुष वार्ष्णेय को गिरफ्तार कर लिया है। वह कथित गेनबिटकॉइन क्रिप्टोकरेंसी धोखाधड़ी मामले का मुख्य आरोपी बताया जा रहा है।
गेनबिटकॉइन पोंजी स्कीम से जुड़ा मामला
जांच एजेंसी के अनुसार यह मामला वेरिएबलटेक प्राइवेट लिमिटेड द्वारा शुरू की गई कथित गेनबिटकॉइन पोंजी स्कीम से जुड़ा है। इस योजना के तहत निवेशकों को भारी मुनाफे का लालच देकर क्रिप्टोकरेंसी में निवेश करने के लिए प्रेरित किया गया और बाद में निवेशकों की रकम का दुरुपयोग किया गया।
Gainbitcoin crypto scam: सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर हो रही जांच
इस मामले की जांच भारतीय दंड संहिता की धारा 120बी, 406, 420 और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 की धारा 66 के तहत की जा रही है। सुप्रीम कोर्ट ने 13 दिसंबर को इस घोटाले से जुड़े मामलों की जांच सीबीआई को एक सामान्य जांच एजेंसी के रूप में सौंपने का निर्देश दिया था।
तकनीकी ढांचे में डार्विन लैब्स की भूमिका
जांच में सामने आया कि डार्विन लैब्स प्राइवेट लिमिटेड और उसके सह-संस्थापकों की इस योजना के तकनीकी ढांचे को विकसित करने में अहम भूमिका थी। बताया गया कि एमसीएपी (MCAP) क्रिप्टो टोकन और उससे जुड़े ईआरसी-20 स्मार्ट कॉन्ट्रेक्ट के डिजाइन, विकास और तैनाती में आयुष वार्ष्णेय के अलावा साहिल बागला और निकुंज जैन भी शामिल थे। कथित तौर पर कंपनी ने इस योजना के लिए कई तकनीकी प्लेटफॉर्म विकसित किए थे, जिनमें बिटकॉइन माइनिंग पूल प्लेटफॉर्म, बिटकॉइन पेमेंट गेटवे, कॉइन बैंक बिटकॉइन वॉलेट और गेनबिटकॉइन निवेशक वेबसाइट शामिल हैं।
Gainbitcoin crypto scam: देश छोड़कर भागने की कोशिश में पकड़ा गया
सीबीआई के अनुसार आरोपी के खिलाफ पहले ही लुकआउट सर्कुलर जारी किया गया था। 9 मार्च को वह देश छोड़ने की कोशिश कर रहा था, तभी मुंबई एयरपोर्ट पर इमिग्रेशन अधिकारियों ने उसे रोक लिया और बाद में सीबीआई को सौंप दिया। इसके बाद कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए सीबीआई ने आयुष वार्ष्णेय को गिरफ्तार कर लिया। फिलहाल मामले में आगे की जांच जारी है।
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