US Israel War against Iran: ईरान ने इजरायल के लिए जासूसी करने के आरोप में एक व्यक्ति को फांसी दे दी है। मिजान न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, फांसी दी गई व्यक्ति की पहचान कुरोश कीवानी के रूप में हुई। उसे दोषी पाया गया कि उसने इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद को ईरान में संवेदनशील जगहों की तस्वीरें और जानकारी दी।
मोसाद से जुड़े मामलों में सख्ती
इजरायल के साथ लंबे समय से युद्ध में उलझा ईरान मोसाद से जुड़े मामलों में बेहद सख्त रहा है। देश के अंदर मोसाद के ऑपरेशन में मदद करने वालों को अक्सर मौत की सजा दी जाती है। जब युद्ध की स्थिति बढ़ती है, तो फांसी की सजा में तेजी आ जाती है।
जेरुशलम पोस्ट के अनुसार, इससे पहले 28 जनवरी को ईरान ने एक और इजरायली जासूस को फांसी दी थी। उस व्यक्ति का नाम हामिद्रेजा सबेट एस्माईलिपुर था और वह मोसाद एजेंट होने के आरोप में मौत के फंदे पर लटका।

US Israel War against Iran: इजरायल की खुफिया ताकत
इजरायल की ताकत का बड़ा कारण उसकी खुफिया एजेंसी मोसाद मानी जाती है। यह दुनिया की सबसे प्रभावी एजेंसियों में से एक है। मोसाद की मदद से इजरायल, ईरान में जासूसी करने, आतंकवादी गतिविधियों को रोकने, गुप्त अभियान चलाने और रणनीतिक जानकारी इकट्ठा करने में माहिर है। मोसाद ने दशकों से अपने देश की सुरक्षा के लिए बॉर्डर के बाहर भी जटिल ऑपरेशन किए हैं।
तेहरान में इजरायली हमला
17 मार्च को ईरान के सुरक्षा प्रमुख अली लारिजानी को इजरायल ने मार गिराया। यह ईरान के लिए सुप्रीम लीडर की मौत के बाद दूसरा बड़ा झटका माना जा रहा है। ईरान इंटरनेशनल की रिपोर्ट के अनुसार, लारिजानी की हत्या संभव हुई क्योंकि तेहरान के कुछ नागरिकों से मिली जानकारी सीधे इजरायल की खुफिया एजेंसी तक पहुंची।
मोसाद की खुफिया ताकत का उदाहरण
इस घटना से यह साफ होता है कि मोसाद की ताकत और प्रभावी जासूसी नेटवर्क ईरान में भी अपना असर दिखा रहा है। ऐसे मामलों से यह भी जाहिर होता है कि युद्ध और खुफिया संघर्ष के बीच, फांसी की सजा और तेज होती है।
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