India Oil Rupee Trade: ईरान ने पूरे मिडिल ईस्ट में अमेरिका के सैन्य और ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाकर हालात को और गंभीर बना दिया है। इन हमलों में कई ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचा। इसके साथ ही स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में भी स्थिति तनावपूर्ण हो गई है।
ईरान की सख्ती के कारण वहां से गुजरने वाले जहाजों के लिए हालात बेहद कठिन हो गए हैं। ईरान ने इजरायल और अमेरिका के सहयोगी देशों के जहाजों को इस समुद्री रास्ते से गुजरने की अनुमति नहीं दी है। हालांकि उसने भारत, चीन और रूस जैसे देशों को अपना मित्र बताते हुए उनके जहाजों को गुजरने की छूट दी है।
इसी बीच भारत ने एक ऐसा कदम उठाया है जिसने वैश्विक आर्थिक हलकों को चौंका दिया है। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, मिडिल ईस्ट में बने हालात को देखते हुए भारत ने तेल खरीदने के लिए अमेरिकी डॉलर के बजाय रुपये का इस्तेमाल शुरू कर दिया है।

अपनी मुद्रा में भुगतान कर भारत ने दिखाया आत्मविश्वास
मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव के कारण कई देशों को अपने जहाजों को सुरक्षित निकालने और व्यापार जारी रखने के लिए डॉलर या युआन में भुगतान करना पड़ रहा है। वहीं भारत ने एक अलग रास्ता अपनाया है।
अब भारतीय तेल रिफाइनरियां रूसी तेल खरीदते समय अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम कर रही हैं और भुगतान रुपये में कर रही हैं। इसके बाद यह पैसा विदेशी खातों में जमा किया जाता है और वहां से जरूरत के अनुसार यूएई के दिरहम या चीन के युआन में बदला जाता है।
यह बदलाव ऐसे समय में आया है जब दुनिया में भू-राजनीतिक तनाव बढ़ रहा है और अमेरिकी नीतियों में भी लगातार बदलाव देखने को मिल रहा है। ऐसे माहौल में भारत का यह कदम उसकी आर्थिक रणनीति और बढ़ते आत्मविश्वास को दर्शाता है।
India Oil Rupee Trade: भारतीय बैंक भी दे रहे हैं नई व्यवस्था को सहारा
रूसी कंपनियां भी अब ऐसे लंबे समय तक चलने वाले भुगतान के विकल्प चाहती हैं, जिन पर अमेरिकी प्रतिबंधों या नीतिगत बदलाव का असर कम पड़े। इसी कारण भारत ने अपनी मुद्रा में लेनदेन बढ़ाने की दिशा में कदम बढ़ाया है।
इस व्यवस्था को आसान बनाने में कुछ भारतीय बैंक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं, खासकर वे बैंक जिनकी विदेशों में मौजूदगी सीमित है। इन लेनदेन में रुपये को विशेष विदेशी खातों में जमा किया जाता है। बाद में जरूरत के अनुसार इसे दिरहम या युआन में बदल दिया जाता है।
इस तरीके से डॉलर आधारित भुगतान प्रणाली पर निर्भरता कम होती है और व्यापारिक लेनदेन अधिक सहज बन जाता है। कुछ मामलों में सिंगापुर डॉलर या हांगकांग डॉलर के इस्तेमाल पर भी विचार किया जा रहा है, हालांकि यह पूरी तरह बैंक की सुविधाओं पर निर्भर करता है।
भारत ने रूस से खरीदा 6 करोड़ बैरल तेल
अमेरिका के दबाव और दावों के बावजूद भारत लगातार रूस से तेल खरीद रहा है। इसे भारत की स्वतंत्र विदेश नीति और संतुलित कूटनीति का उदाहरण माना जा रहा है।
जानकारी के अनुसार भारत ने अप्रैल 2026 के लिए रूस से करीब 6 करोड़ बैरल तेल खरीदा है। मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध के कारण जो सप्लाई प्रभावित हुई है, उसे पूरा करने में यह आयात अहम भूमिका निभा सकता है।
कुछ समय पहले रूसी तेल की कीमत बढ़ने के कारण आयात में थोड़ी कमी आई थी, लेकिन अब फिर से इसमें बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। विशेषज्ञों के मुताबिक यह कदम भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के साथ-साथ डी-डॉलराइजेशन की दिशा में भी एक बड़ा कदम है।
India Oil Rupee Trade: रुपये में व्यापार से डॉलर की पकड़ को चुनौती
भारत के इस फैसले से अंतरराष्ट्रीय व्यापार में डॉलर की पकड़ पर सवाल खड़े होने लगे हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर इस तरह की व्यवस्था आगे भी जारी रहती है तो आने वाले समय में रुपये को डॉलर के मुकाबले मजबूती मिल सकती है।
पिछले कुछ महीनों से भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर हो रहा था। ऐसे में रुपये में तेल खरीदने का फैसला एक महत्वपूर्ण आर्थिक रणनीति माना जा रहा है।
माना जा रहा है कि मिडिल ईस्ट के मौजूदा युद्ध के दौरान अपनी मुद्रा में तेल खरीदने वाला भारत पहला देश बन गया है। यह कदम दुनिया के सामने भारत की स्वतंत्र और संतुलित विदेश नीति का एक बड़ा उदाहरण भी पेश करता है।







