Adani on AI: अदाणी ग्लोबल इंडोलॉजी कॉन्क्लेव 2025 में अदाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अदाणी ने शुक्रवार को कहा कि आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस (AI) का मौजूदा रूप भारत की सभ्यता और संस्कृति के लिए खतरा बन रहा है। अदाणी का कहना है कि एआई धर्म और भारतीय परंपराओं को जिस तरह परिभाषित करता है, वह सतही और गलत है।
एआई पश्चिमी फिल्टर पर चलता है, भारतीय संदर्भ गायब
उन्होंने कहा कि एआई मॉडल जिन्हें हम भरोसेमंद मानते हैं, वे असल में पश्चिमी मानकों पर बने ‘ब्लाइंड-फोल्डेड गेटकीपर्स’ जैसे हैं, जो भारतीय संस्कृति की गहराई को समझ नहीं पाते।
Adani on AI: वैदिक ज्ञान और इतिहास को AI नहीं समझ पाता
अदाणी ने कहा कि एआई हमारे इतिहास और वैदिक प्रथाओं में छिपे सार को पकड़ ही नहीं पाता। कई बार ये मॉडल प्राचीन सत्य को मिथक या हानिकारक बताकर खारिज कर देते हैं, क्योंकि इनके पास जरूरी सांस्कृतिक दृष्टिकोण है ही नहीं।
Adani on AI: मशीनें धर्म और संस्कृति को गलत बता रही हैं
उन्होंने उदाहरण देकर कहा कि विदेशों में बच्चे अगर पूछें धर्म क्या है या गीता का सार क्या है, तो वे किताब या गुरु के पास नहीं जाएंगे, सीधे मशीन से पूछेंगे। और यही असली खतरा है, क्योंकि मशीनें हमारी संस्कृति को सही संदर्भ में प्रस्तुत ही नहीं करतीं।
“राख में भी अग्नि जला दे, यही भारत की ताकत”
गौतम अदाणी ने कहा कि अगर भारत अपने सांस्कृतिक और डिजिटल सामर्थ्य को सही दिशा में लगा दे, तो देश आर्थिक ही नहीं, सभ्यता के स्तर पर भी दुनिया में नेतृत्व कर सकता है।
सभ्यता जितनी मजबूत, अर्थव्यवस्था उतनी स्थिर
अदाणी के मुताबिक भारत को सिर्फ आर्थिक शक्ति की नहीं, बल्कि सांस्कृतिक आत्मविश्वास और पहचान की भी जरूरत है। मजबूत सभ्यता ही स्थिर अर्थव्यवस्था और वैश्विक नेतृत्व की नींव बनती है।
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