AI Summit 2026: दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित AI Impact Summit 2026 के दौरान एक चार पैरों वाला रोबोट डॉग अचानक चर्चा का केंद्र बन गया। लोग उसके साथ तस्वीरें लेने लगे, वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने लगे और देखते ही देखते सवाल उठ खड़ा हुआ क्या ऐसे रोबोट सिर्फ प्रदर्शन के लिए होते हैं या इनके पीछे गंभीर तकनीक और कानूनी अधिकार भी जुड़े होते हैं?ग्रेटर नोएडा की एक यूनिवर्सिटी ने इस रोबोट को अपनी उपलब्धि बताकर पेश किया, लेकिन ऑनलाइन पड़ताल में सामने आया कि यह मॉडल असल में विदेशी निर्माण से जुड़ा है। इसके बाद सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई और तकनीक के साथ-साथ पेटेंट अधिकारों पर भी चर्चा शुरू हो गई।
क्या रोबोट का पेटेंट कराया जा सकता है?
टेक्नोलॉजी विशेषज्ञों के अनुसार, अगर कोई रोबोट नया है, पहले से मौजूद तकनीक से अलग है और उसका व्यावसायिक उपयोग संभव है, तो उसका पेटेंट कराया जा सकता है। पेटेंट का मतलब है आविष्कार पर कानूनी सुरक्षा।रोबोट के मामले में सिर्फ मशीन ही नहीं, बल्कि उसका सॉफ्टवेयर, एआई सिस्टम, कंट्रोल एल्गोरिद्म, सेंसर तकनीक और डिजाइन भी पेटेंट के दायरे में आते हैं। यही कारण है कि मेडिकल रोबोट, इंडस्ट्रियल रोबोटिक आर्म, डिलीवरी ड्रोन और स्मार्ट घरेलू रोबोट तक पेटेंट कराए जाते हैं।
AI Summit 2026: पेटेंट में आविष्कारक कौन होता है?
एक अहम नियम यह है कि अधिकांश देशों में पेटेंट के लिए इंसान का नाम आविष्कारक के रूप में दर्ज होता है। भले ही एआई या मशीन ने डिजाइन में मदद की हो, लेकिन कानूनी रूप से आविष्कारक इंसान ही माना जाता है। भारत, अमेरिका और यूरोप में एआई को अभी तक खुद आविष्कारक का दर्जा नहीं दिया जाता।
AI Summit 2026: कितना आता है खर्च?
भारत में रोबोट या किसी टेक इनोवेशन का पेटेंट कराने की लागत कई बातों पर निर्भर करती है। सामान्य तौर पर सरकारी फीस और ड्राफ्टिंग मिलाकर खर्च करीब 25 हजार से 1 लाख रुपये तक हो सकता है। जटिल तकनीक या बड़ी कंपनियों के मामलों में यह लागत ज्यादा भी हो सकती है।अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पेटेंट कराने पर खर्च 5,000 डॉलर से 16,000 डॉलर या उससे अधिक तक पहुंच सकता है।पेटेंट मिलने के बाद उसे बनाए रखने के लिए समय-समय पर मेंटेनेंस फीस भी देनी होती है।
कहां और कैसे करें आवेदन?
भारत में पेटेंट आवेदन भारतीय पेटेंट कार्यालय के जरिए किया जाता है, जो उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग के तहत काम करता है।अगर किसी कंपनी या स्टार्टअप को कई देशों में सुरक्षा चाहिए, तो वे WIPO के जरिए PCT मार्ग अपनाते हैं, जिससे एक साथ कई देशों में पेटेंट प्रक्रिया शुरू की जा सकती है।
AI Summit 2026: रोबोटिक्स पेटेंट में कौन आगे?
दुनिया में रोबोटिक्स पेटेंट के मामले में चीन तेजी से आगे बढ़ रहा है, खासकर औद्योगिक और ट्रांसपोर्ट सेक्टर में। अमेरिका एआई और मेडिकल रोबोटिक्स में मजबूत है, जबकि जापान और दक्षिण कोरिया ऑटोमेशन टेक्नोलॉजी में अग्रणी माने जाते हैं। भारत में भी रोबोटिक्स और एआई से जुड़े पेटेंट तेजी से बढ़ रहे हैं।आज रोबोट सिर्फ फैक्ट्रियों तक सीमित नहीं हैं। हेल्थकेयर, लॉजिस्टिक्स, कृषि, सुरक्षा और घरेलू कामों में भी उनका इस्तेमाल बढ़ रहा है। ऐसे में पेटेंट सिर्फ कानूनी प्रक्रिया नहीं, बल्कि तकनीकी निवेश और बिजनेस को सुरक्षित रखने का मजबूत माध्यम बन चुका है। AI समिट में दिखे रोबोट डॉग ने एक बार फिर यह याद दिलाया है कि तकनीक जितनी तेजी से आगे बढ़ रही है, उतना ही जरूरी है उसके अधिकारों और स्वामित्व को समझना। रोबोट का पेटेंट अब भविष्य की तैयारी ही नहीं, बल्कि प्रतिस्पर्धा में आगे रहने का अहम हथियार भी बन गया है।
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